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लड़कियों को गले लगाओ और पैसे कमाओ, 5 मिनट की झप्पी के लिए लड़के चार्ज करते हैं 600 रुपये, गजब का बिजनेस

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव हर किसी की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी इसका तेजी से शिकार बन रही है। ऐसे में चीन में एक अनोखा और बेहद दिलचस्प ट्रेंड (Man Mums Trend) ने लोगों का ध्यान खींचा है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव हर किसी की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी इसका तेजी से शिकार बन रही है। ऐसे में चीन में एक अनोखा और बेहद दिलचस्प ट्रेंड (Man Mums Trend) ने लोगों का ध्यान खींचा है। यहां की लड़कियां अपने स्ट्रेस को दूर करने के लिए अब थैरेपी (Therapy) या दवाओं का नहीं, बल्कि ‘मैन मम्स’ नाम के लड़कों का सहारा ले रही हैं। यह कोई रिश्ता नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल सर्विस है, जिसमें मस्कुलर लड़के सिर्फ एक गले लगाने (हग) के लिए पैसे चार्ज करते हैं।

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एक हग के मिलते हैं इतने रुपये

मैन मम्स (Man Mums) शब्द का इस्तेमाल उन जिम जाने वाले मजबूत शरीर वाले युवकों के लिए किया जाता है, जो थके-हारे, परेशान और भावनात्मक रूप से टूट चुकी लड़कियों को कुछ मिनटों की राहत देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये युवक हर एक हग के लिए 20 से 50 युआन (लगभग 250 से 600 रुपये) तक चार्ज करते हैं और हर हग का समय करीब 5 मिनट होता है।

जानें कैसे शुरू हुई हग थैरेपी?

इस ट्रेंड की शुरुआत तब हुई जब एक छात्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह थीसिस के दबाव से बेहद परेशान थी और उस वक्त उसे किसी का गले लगाना ज़रूरी लग रहा था। उसने स्कूल में एक दोस्त को गले लगाया और पाया कि उसका मन बहुत हल्का हो गया। उसकी यह ईमानदार पोस्ट वायरल हो गई और देखते ही देखते चीन में ‘हग थैरेपी’ जैसी इस सर्विस की डिमांड बढ़ गई।

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ऐसे लड़का तय करती हैं लड़कियां

आज मैन मम्स आपको मेट्रो स्टेशन, पार्क या शॉपिंग मॉल जैसी जगहों पर आसानी से दिख जाएंगे। लड़कियां उन्हें न सिर्फ गले लगाती हैं, बल्कि अपनी परेशानियां भी साझा करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिलता है। इस सर्विस को चुनने में भी लड़कियां काफी सोच-समझकर फैसला करती हैं। वे लड़कों के लुक्स, बिहेवियर, बातचीत करने का तरीका और उनके एटीट्यूड को देखकर तय करती हैं कि किससे गले लगना है।

यह सुनने में अजीब ज़रूर लग सकता है, लेकिन चीन में यह अब एक उभरता हुआ माइक्रो-बिजनेस है। जहां इमोशन्स की भी कीमत तय हो चुकी है। कोई इसे ‘थैरेपी’ मानता है, तो कोई सिर्फ एक सपोर्टिव जेस्चर। लेकिन एक बात तो साफ है—तेज़ होती ज़िंदगी में अगर 5 मिनट की एक झप्पी से किसी को राहत मिलती है, तो शायद यह तरीका किसी दवा से कम असरदार नहीं।

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