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NASA के एस्ट्रोनॉट्स अब iPhone से ले सकेंगे चांद की सेल्फ़ी, आज फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से आर्टेमिस II मिशन लॉन्च

आज सुबह 3 बजकर 58 मिनट पर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से NASA का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च हुआ। यह मिशन 1972 के अपोलो 17 के बाद इंसानों को चांद के पास ले जाने वाला पहला अभियान है। इस मिशन का उद्देश्य सिर्फ उड़ान भरना नहीं, बल्कि भविष्य में चांद पर स्थाई मानव उपस्थिति और मंगल जैसे दूरस्थ ग्रहों तक मानव यात्रा का मार्ग खोलना है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। आज सुबह 3 बजकर 58 मिनट पर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से NASA का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च हुआ। यह मिशन 1972 के अपोलो 17 के बाद इंसानों को चांद के पास ले जाने वाला पहला अभियान है। इस मिशन का उद्देश्य सिर्फ उड़ान भरना नहीं, बल्कि भविष्य में चांद पर स्थाई मानव उपस्थिति और मंगल जैसे दूरस्थ ग्रहों तक मानव यात्रा का मार्ग खोलना है।

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इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। तीन अमेरिकी और एक कनाडाई जो ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद की कक्षा का चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित लौटेंगे। मिशन की अवधि 10 दिन की है, जिसमें एस्ट्रोनॉट लगभग एक पूरा दिन चांद की कक्षा में बिताएंगे।

पहली बार अंतरिक्ष में पर्सनल स्मार्टफोन

इस मिशन को और खास बनाने वाला एक बड़ा बदलाव यह है कि NASA ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार पर्सनल स्मार्टफोन साथ ले जाने की अनुमति दी है। इससे वे अपने परिवार और दुनिया के लिए अनोखी तस्वीरें और वीडियो कैद कर पाएंगे। NASA के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन के अनुसार इसका मकसद आधुनिक उपकरण देकर अंतरिक्ष यात्रियों को अपने अनुभव और प्रेरक पल साझा करने में सक्षम बनाना है।

मिशन के एस्ट्रोनॉट्स और उनकी कहानी:

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रीड वाइसमैन (कमांडर) – नासा के अंतरिक्ष यात्री, अमेरिकी नौसेना के एविएटर और टेस्ट पायलट। यह उनकी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान है।

विक्टर ग्लोवर (पायलट) – यह मिशन उन्हें चांद का पहला अश्वेत पायलट बनने का गौरव दिलाएगा।

क्रिस्टीना कोच (विशेषज्ञ) – नासा की इंजीनियर और वैज्ञानिक, जिनके नाम 328 दिनों तक अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड है। वह पहली महिला स्पेस वॉक का हिस्सा रह चुकी हैं।

जेरेमी हैनसेन (विशेषज्ञ, कनाडा) – रॉयल कनाडाई एयरफोर्स के फाइटर पायलट और यह उनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान है।

आर्टेमिस II मिशन का उद्देश्य

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चांद पर स्थाई मानव उपस्थिति बनाना।

भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन को संभव बनाना।

पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष का मौसम और सूर्य की गतिविधियों की निगरानी करना, जैसे सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन।

मिशन की समय-रेखा

पहले दिन: यान को ऑर्बिट से बाहर निकालना।

अगले 3–4 दिन: चांद की तरफ यात्रा।

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एक दिन: चांद की कक्षा में चक्कर।

अंतिम 4 दिन: पृथ्वी की ओर वापसी।

NASA का यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि इंसानी जिज्ञासा और साहस का प्रतीक है। इस मिशन के दौरान आने वाली तस्वीरें और वीडियो न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि दुनिया के लाखों लोगों को भी प्रेरित करेंगे।

रिपोर्ट: कौशिकी गुप्ता

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