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हमले के एक साल बाद फिर पहलगाम की वादियां गुलजार, सुरक्षा के अभेद्य कवच के बीच पर्यटकों की वापसी

"जख़्म गहरे हैं, लेकिन हौंसले हारे नहीं हैं।" आज ही के दिन 22 अप्रैल को ठीक एक साल पहले आतंकी हमले ने पहलगाम की शांत वादियों में खौफ पैदा कर दिया था। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले इस इलाके में एक साल बाद अब डर की जगह धीरे-धीरे जिंदगी की रौनक और पर्यटन की उम्मीदें फिर ​से बढ़ रही हैं।

By संतोष सिंह 
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पहलगाम। “जख़्म गहरे हैं, लेकिन हौंसले हारे नहीं हैं।” आज ही के दिन 22 अप्रैल को ठीक एक साल पहले आतंकी हमले ने पहलगाम की शांत वादियों में खौफ पैदा कर दिया था। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले इस इलाके में एक साल बाद अब डर की जगह धीरे-धीरे जिंदगी की रौनक और पर्यटन की उम्मीदें फिर ​से बढ़ रही हैं। यहां के मुख्य बाजारों में शाम को लाइटें फिर से जगमगाने लगी हैं। वहां के स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों के भरोसे को बढाने के लिए बहुत बेजोड़ सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

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डिजिटल सुरक्षा : अब पहलगाम में वहां के हर होटल कर्मचारी, गाइड और घोड़े वालों (Pony walas) को QR कोड आधारित आईडी कार्ड जारी किया गया हैं। इसके अलावा पर्यटकों को उन्हें खुद को सुरक्षित महसूस कराने के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है।

हांलाकि पर्यटन के लिहाज से और व्यापारिक दृष्टि से यह साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। आकड़ों के अनुसार, यहां पर पिछले साल के मुकाबले पर्यटकों की आमदनी में लगभग 60 से 70 प्रतिशत की कमी देखी गई है। पहलगाम की मिनी स्विट्जरलैंड कही जानेवाली बैसरन घाटी को प्रशासन जल्द ही सीमित आधार पर खोलने की योजना बना रहा है जो पिछले साल हमले का केंद्र थी। इस जगह को सुरक्षा कारणों से फिलहाल पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित किया गया है। अलग—अलग राज्यों मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले सैलानी अब फिर से अरू वैली और बेताब वैली में दिखने लगे हैं।

वहां के निवासियों और स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उनकी कमाई में बहुत कमी आई है, लेकिन वे फिर भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। एक स्थानीय होटल व्यवसायी ने बताया कि हम मेहमानों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं और इसके अलावा वहां के स्थानीय होटल व्यवसायियों ने ये भी ​कहा कि पहलगाम की नज़ाकत वहां के रहनेवाले लोगों के प्यार और शांति में है, जिसे कोई भी हमला नहीं छीन सकता।

प्रशासनिक रुख : पहलगाम के पर्यटन विभाग ने अगले महीने से ‘पहलगाम विंटर एंड स्प्रिंग फेस्टिवल’ के आयोजन की घोषणा की है। इसका उदेश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि कश्मीर की ये मनमोहक और खूबसूरत वादियां अब पूरी तरह स्वागत योग्य और सुरक्षित हैं।

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