रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। बैठक में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान एक बार फिर साफ किया कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है...
नई दिल्ली। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। बैठक में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान एक बार फिर साफ किया कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने कहा कि बातचीत के रास्ते ही स्थायी शांति की उम्मीद की जा सकती है।
पुतिन तक पहुंचाया संदेश
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, लावरोव ने पीएम मोदी को दिसंबर 2025 में हुई उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में हुई प्रगति की जानकारी दी। मोदी ने इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन के लिए अपना विशेष संदेश और शुभकामनाएं भी भेजीं। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई।
जयशंकर और लावरोव की अलग बैठक
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी सर्गेई लावरोव से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने बदलते वैश्विक हालात के बीच ऊर्जा, व्यापार, विज्ञान और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बैठक को “सार्थक” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देश निवेश, कनेक्टिविटी और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।
ब्रिक्स बैठक के लिए भारत पहुंचे कई नेता
लावरोव भारत में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस सम्मेलन में अब्बास अराघची, मौरो विएरा और रोनाल्ड लामोला समेत कई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि सम्मेलन में वैश्विक तनाव, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।