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Pongal 2025 : पोंगल में दिन रंगोली बनाई जाती है और मवेशियों का पूजन किया जाता है,  जानें कब मनाया जाएगा

पोंगल दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है और इस पर्व को  खास तौर पर कर्नाटक, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Pongal 2025 : पोंगल दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है और इस पर्व को  खास तौर पर कर्नाटक, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। पोंगल के त्योहार को नव वर्ष के शुभारंभ के तौर मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व भी सूर्य के उत्तरायण का त्योहार है। इस त्योहार के दिन लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाकर खाते हैं। यह उनकी परंपरा से जुड़ा हुआ है, जो की धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

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साल 2025 में यह त्योहार 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल पर्व मनाए जाते हैं।

पोंगल पूजा का शुभ समय 
2025 में सूर्य पोंगल के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करनी चाहिए।

भोगी पोंगल (14 जनवरी 2025):
यह पोंगल का पहला दिन होता है। तमिलनाडु को लोग इस दिन पुराने सामानों को त्यागकर नए सिरे से जीवन शुरू करने की परंपरा है। इस दिन लोग अपने पुराने सामानों को जलाकर नाच-गाना आदि करते हैं।

सूर्य पोंगल (15 जनवरी 2025)
पोंगल के दूसरे दिन मुख्य रूप से सूर्य देवता की पूजा की जाती है और नई फसल से तैयार किए गए पकवान चढ़ाए जाते हैं। इसे मुख्य पोंगल दिवस भी कहते हैं।

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मात्तु पोंगल (16 जनवरी 2025)
इस पर्व का तीसरा दिन गाय गायों और बैलों को समर्पित होता है। इस दिन उनको नहलाया जाता है साथ ही उनके सींगों को रंग कर सजाया जाता है। इसके बाद उनकी पूजा की जाती है।

कन्या पोंगल (17 जनवरी 2025) 
यह पोंगल का चौथ और आखिरी दिन होता है। जिसे तिरुवल्लूर नाम से भी जाना जाता है। सामाजिक मेलजोल और रिश्तों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

मवेशियों को सजाया जाता है
पोंगल पर घरों की विशेष रूप से साफ-सफाई और सजावट की जाती है।इस त्योहार में घरों की पुताई की जाती है व रंगोली बनाई जाती है, मवेशियों को सजाया जाता है। नए कपड़े और नए बर्तन खरीदे जाते हैं।

मीठा पोंगल
पोंगल के दिनों में घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है और खेत में उगी चीजों से सूर्यदेव को भोग लगाया जाता है। पोंगल के अंतिम दिन को कन्नुम पोंगल कहते हैं। सभी परिवार एक हल्दी के पत्ते को धोकर इसे जमीन पर बिछाते हैं और इस पर एक दिन पहले का बचा हुआ मीठा पोंगल रखते हैं। वे गन्ना और केला भी शामिल करते हैं। कई महिलाएं यह रस्म प्रातः काल नहाने से पहले करना पसंद करती हैं।

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