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शादी में रसगुल्ले की मची लूट…, जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह पर गिरी गाज, जानें पूरा मामला?

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना (Mukhyamantri Samuhik Vivah Yojana) के तहत कानपुर में आयोजित भव्य कार्यक्रम अव्यवस्थाओं की वजह से विवादों में घिर गया है। इस समारोह की बदइंतजामी का खामियाजा जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह (District Social Welfare Officer Shilpi Singh) को भुगतना पड़ा है।

By santosh singh 
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लखनऊ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना (Mukhyamantri Samuhik Vivah Yojana) के तहत कानपुर में आयोजित भव्य कार्यक्रम अव्यवस्थाओं की वजह से विवादों में घिर गया है। इस समारोह की बदइंतजामी का खामियाजा जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह (District Social Welfare Officer Shilpi Singh) को भुगतना पड़ा है। शासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें कानपुर से हटाकर समाज कल्याण निदेशालय, लखनऊ (Social Welfare Directorate, Lucknow) से अटैच कर दिया है। उनकी जगह संभल में तैनात शिवम सागर को नया जिला समाज कल्याण अधिकारी बनाकर कानपुर भेजा गया है। यह कार्रवाई अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू (Additional Chief Secretary L. Venkateshwar Lu) के आदेश पर की गई।

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रसगुल्ले के लिए सबसे ज्यादा मारामारी

सीएसए परिसर में आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह (Samuhik Vivah Yojana) में कुल 562 जोड़ों का विवाह और निकाह संपन्न हुआ था। लेकिन कार्यक्रम के दौरान खाने-पीने की गंभीर कमी सामने आई, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। किसी को रोटी मिली तो सब्जी नसीब नहीं हुई, वहीं रसगुल्ले के लिए सबसे ज्यादा मारामारी देखी गई। भोजन को लेकर मचे हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन की किरकिरी होने लगी। ठेकेदार की ओर से यह सफाई दी गई कि भोजन की व्यवस्था केवल 450 जोड़ों और उनके परिजनों के लिए ही की गई थी। खाने के अलावा नवविवाहित जोड़ों को दिए जाने वाले उपहारों में भी खामियां पाई गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ के निर्देश पर एडीएम सिटी (ADM City) के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की गई है। कार्यक्रम के महज दो दिन बाद ही शासन ने अव्यवस्थाओं का संज्ञान लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer) को हटा दिया।

हालांकि, ढाई करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया की जांच न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। दो फर्मों को करीब 2.50 करोड़ रुपये के टेंडर दिए गए थे, फिर भी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं। इसके बावजूद संबंधित फर्मों के खिलाफ न तो कोई रिपोर्ट दर्ज कराई गई और न ही टेंडर प्रक्रिया की जांच शुरू हुई। फिलहाल जांच सिर्फ अव्यवस्थाओं और सामान तक सीमित है, जिसे कई लोग महज खानापूर्ति मान रहे हैं। बताया गया है कि योजना के तहत 959 जोड़ों का पंजीकरण हुआ था, जिनमें से 635 जोड़ों का विवाह प्रस्तावित था, लेकिन अंततः 562 जोड़ों का ही विवाह हो सका। डीएम पहले ही शिल्पी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर चुके थे। एडीएम सिटी डॉक्टर राजेश कुमार (ADM City Dr. Rajesh Kumar) के अनुसार जांच लगभग पूरी हो चुकी है और सोमवार तक रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, हालांकि टेंडर से जुड़े पहलुओं को जांच से बाहर रखा गया है।

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