Union Minister Bhagirath Subsidy Controversy : मध्य-प्रदेश में सीएम मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब एक नया मामला सामने आया है। जिसमें केंद्रीय मंत्रि भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होने का बाद सियासी घमासान छिड़ना तय माना जा रहा है।
Union Minister Bhagirath Subsidy Controversy : मध्य-प्रदेश में सीएम मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब एक नया मामला सामने आया है। जिसमें केंद्रीय मंत्रि भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होने का बाद सियासी घमासान छिड़ना तय माना जा रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के तहत चलने वाली एक योजना से सब्सिडी मिली है। वह इस संस्था के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं। राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत में बने कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस पर लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, “राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।” बोर्ड पर लाभार्थी का नाम ‘भागीरथ चौधरी’ और 50% सब्सिडी की रकम ‘99,60,000 रुपये’ लिखी गई है।
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि केंद्रीय मंत्री को तीन महीने पहले ही उनके मंत्रालय के तहत चलने वाली एक सरकारी योजना के जरिए यह सब्सिडी मिली थी। इस योजना को जिस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने मंजूरी दी थी, उसमें केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। यानी यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें भागीरथ चौधरी खुद मंत्री (MOS) हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना “हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास” के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है।
कृषि राज्य मंत्री के तौर पर, भागीरथ चौधरी उस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं जिसने बागवानी योजना के तहत उनके राजस्थान प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी थी। पिछले साल मंज़ूर हुए कुल 467 प्रोजेक्ट्स में से उनका प्रोजेक्ट भी एक था; उनके सहयोगी का कहना है कि इसकी जानकारी सरकार को दी जाएगी।
कॉमर्शियल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2014-15 में लॉन्च की गयी मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) नाम की योजना का संचालन एनएचबी द्वारा किया जाता है और यह बोर्ड भागीरथ चौधरी के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आता है। योजना के तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और आठ किस्म के फूलों की खेती के लिए अधिकतम 50% तक सब्सिडी दी जाती है। इसमें हर परिवार के लिए लिमिट 1 करोड़ रुपये है।
केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी की खेती का यह प्रोजेक्ट 16,592 वर्ग मीटर में है। एनएचबी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बोर्ड के कामकाज का प्रबंधन निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है। केंद्रीय कृषि मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष और कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के लिए 15 अप्रैल, 2025 को अर्जी दी और 29 अप्रैल 2025 को इसे मंजूरी मिल गई थी। 11 मार्च, 2026 को इस प्रोजेक्ट को बोर्ड से अंतिम मंजूरी मिल गई थी और 30 मार्च को 99.03 लाख रुपए की सब्सिडी भागीरथ चौधरी के एचडीएफसी लोन बैंक अकाउंट में जमा कर दी गई।
अखबार की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि भागीरथ चौधरी ने इस योजना के तहत सब्सिडी लेने के लिए सितंबर, 2018 में भी एक आवेदन दिया था लेकिन जरूरी दस्तावेज समय पर जमा नहीं हो सके थे और इसलिए आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
बता दें कि मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना से सब्सिडी हासिल करने के लिए व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, उत्पादकों के संघ या समूह, ट्रस्ट, सहकारी समितियां, कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी विपणन संघ, कृषि उपज विपणन समितियां, विपणन बोर्ड, नगर निगम, कृषि-उद्योग निगम, राज्य कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान एवं विकास संगठन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल, केंद्रीय मंत्री को सब्सिडी दिये जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।