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Sharad Purnima 2026 : शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की कलाएं बिखेरती हैं जादू , आसमान से बरसता है अमृत

सदियों से हम मानते आए हैं कि सूरज की किरणें हमें जीवन देती हैं, लेकिन चंद्रमा की ये शीतल किरणें (Moonlight) चुपचाप एक ऐसा जादू बिखेरती हैं, जो हमारी सेहत, प्रकृति और यहाँ तक कि हमारी भावनाओं को भी बदल देता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Sharad Purnima 2026 : सदियों से हम मानते आए हैं कि सूरज की किरणें हमें जीवन देती हैं, लेकिन चंद्रमा की ये शीतल किरणें (Moonlight) चुपचाप एक ऐसा जादू बिखेरती हैं, जो हमारी सेहत, प्रकृति और यहाँ तक कि हमारी भावनाओं को भी बदल देता है। जैसे चंद्रमा अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (Gravity) से समुद्र में ऊँची लहरें (Tides) उठाता है, ठीक वैसे ही इसका असर हमारे शरीर पर भी होता है।

पढ़ें :- Sharad Purnima 2026 : शरद पूर्णिमा का चांद माना जाता है चमत्कारी, जानें अर्घ्य देने और खीर रखने का सही समय

चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है
क्या आप जानते हैं कि पूरे साल में सिर्फ एक ही ऐसी रात होती है, जब चांद अपनी सबसे खूबसूरत और शक्तिशाली अवस्था में होता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं शरद पूर्णिमा की। मान्यताओं के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल इसी रात को चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। लेकिन क्या हैं ये 16 कलाएं और क्यों इस रात आसमान से अमृत बरसने की बात कही जाती है?

विशेष आध्यात्मिक और मानवीय गुण
हिंदू शास्त्रों और ज्योतिष विज्ञान में चंद्रमा की 16 कलाओं का मतलब उसकी 16 विभिन्न शक्तियों, गुणों और अवस्थाओं से है। ये 16 कलाएं हैं— अमृत, नंदा, पुष्प, पुष्टि, तुष्टि, धृति, शाशिनी, चंद्रिका, कांति, ज्योत्स्ना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्ण, पूर्णामृत और अनुग्रह। प्रत्येक कला का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और मानवीय गुण होता है, जो सुख, समृद्धि, शांति और आरोग्यता प्रदान करता है।

महारास
जहां भगवान श्रीराम 12 कलाओं के साथ अवतरित हुए थे, वहीं भगवान श्रीकृष्ण को इन सभी 16 कलाओं का स्वामी यानी ‘पूर्णावतार’ कहा गया है। इसी शरद पूर्णिमा की दिव्य रात को श्रीकृष्ण ने वृंदावन के निधिवन में गोपियों के साथ महारास रचाया था।

चंद्रमा की किरणों को ‘सोम’ यानी अमृत माना गया
अब बात करते हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण की। खगोल विज्ञान के अनुसार, शरद पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है। इस वजह से उसकी किरणों का प्रभाव हमारे शरीर, मन और धरती की वनस्पतियों पर सबसे सीधा और सकारात्मक पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार, चंद्रमा की किरणों को ‘सोम’ यानी अमृत माना गया है।रात में उगने वाली कई जड़ी-बूटियाँ और औषधियां चंद्रमा की रोशनी को सोखकर अपने भीतर औषधीय गुणों को बढ़ाती हैं।

खीर रखने की परंपरा
आयुर्वेद में माना गया है कि इस रात चंद्र देव की किरणों में विशेष औषधीय गुण समाहित हो जाते हैं, जिसे आम बोलचाल में ‘अमृत वर्षा’ कहा जाता है। यही कारण है कि सदियों से इस रात खुले आसमान के नीचे दूध और चावल से बनी खीर रखने की परंपरा है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है
माना जाता है कि रात भर चांदनी को सोखने के बाद यह खीर एक दिव्य औषधि का रूप ले लेती है, जो हमारे मानसिक तनाव को दूर करती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

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