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अंडमान-निकोबार दीप के लोगों की छीनी जा रही है जमीन, लोकतंत्र में जनता की बात सुनी जानी चाहिए : राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि अंडमान-निकोबार दीप (Andaman and Nicobar Islands) के लोगों की जमीन छीनी जा रही है और बिना किसी से पूछे अडानी जैसे बड़े कारोबारियों को दी जा रही है। यहां वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) भी लागू नहीं किया जा रहा है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

विजयपुरम: लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि अंडमान-निकोबार दीप (Andaman and Nicobar Islands) के लोगों की जमीन छीनी जा रही है और बिना किसी से पूछे अडानी जैसे बड़े कारोबारियों को दी जा रही है। यहां वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) भी लागू नहीं किया जा रहा है। यहां रहने वाले लोगों और आदिवासियों को उचित मुआवज़ा नहीं मिल रहा है और चोरी-छिपे भारत की विरासत चुराई जा रही है।

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अंडमान-निकोबार का मुख्य मुद्दा इकोलॉजिकल चोरी है, क्योंकि यहां लाखों-करोड़ों रुपए के पेड़ चुराए जा रहे हैं

उन्होंने कहा कि हम देश को बताएंगे कि यहां क्या हो रहा है और अंडमान-निकोबार द्वीप के लोगों की रक्षा करने का प्रयास करेंगे। राहुल गांधी(Rahul Gandhi)  ने कहा कि अंडमान में पानी की समस्या है। यहां LG की तरफ़ से भी भ्रष्टाचार है। वे राजा की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर और दफ़्तर का नाम भले ही ‘लोक भवन’ रखा है, लेकिन किसी से मिलते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की बात सुनी जानी चाहिए और उनका सम्मान होना चाहिए। अंडमान-निकोबार का मुख्य मुद्दा इकोलॉजिकल चोरी है, क्योंकि यहां लाखों-करोड़ों रुपए के पेड़ चुराए जा रहे हैं और ज़मीन छीनी जा रही है।

ऐसे जंगल जिन्हें उगने में कई पीढ़ियां लग गईं

राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने एक्स पोस्ट पर वीडियो शेयर कर लिखा कि आज ग्रेट निकोबार से गुज़रा। ये मेरी ज़िंदगी के सबसे असाधारण जंगल हैं। ऐसे पेड़ जो हमारी यादों से भी पुराने हैं। ऐसे जंगल जिन्हें उगने में कई पीढ़ियां लग गईं। उन्होंने कहा कि इस द्वीप के लोग भी उतने ही खूबसूरत हैं, चाहे वे आदिवासी समुदाय हों या यहां आकर बसे लोग, लेकिन उनसे वह सब छीना जा रहा है जिस पर उनका हक है।

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यह विकास नहीं ,यह तो विकास की भाषा में छिपा हुआ विनाश है 

सरकार यहां जो कर रही है, उसे वह “प्रोजेक्ट” कहती है। लेकिन मैंने जो देखा, वह कोई प्रोजेक्ट नहीं है। ये तो लाखों पेड़ हैं जिन पर कुल्हाड़ी चलने का निशान लगा हुआ है। ये 160 वर्ग किलोमीटर का वर्षावन है जिसे खत्म होने के लिए छोड़ दिया गया है। ये वे समुदाय हैं जिनकी अनदेखी की गई, जबकि उनके घर उनसे छीन लिए गए। यह विकास नहीं है। यह तो विकास की भाषा में छिपा हुआ विनाश है।

देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक

राहुल गांधी ने कहा कि इसलिए मैं साफ-साफ कहूंगा, और बार-बार कहूंगा: ग्रेट निकोबार में जो कुछ हो रहा है, वह हमारे जीवनकाल में इस देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। इसे रोका जाना चाहिए। और इसे रोका जा सकता है, अगर भारतीय भी वही देखें जो मैंने देखा है।

जब राजा ‘व्यापारी’ बन जाए, तो प्रजा का जंगल, जमीन और जीवन सुरक्षित नहीं रहता

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उन आदिवासी परिवारों से मुलाक़ात की, जो सुनामी के बाद विस्थापित हो गए थे और अब भी अपनी मूल ज़मीन का इंतज़ार कर रहे हैं। उनसे कभी कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। अब, एक “प्रोजेक्ट” के नाम पर, 160 वर्ग किलोमीटर के वर्षावन को नष्ट करने की तैयारी है, जिससे उन्हें एक बार फिर विस्थापन की ओर धकेला जा रहा है। हम उनकी ज़मीन, उनकी आजीविका और उनके भविष्य की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े रहेंगे।

निकोबार के जंगलों की बलि और अडानी की जेब भरना, यही है भाजपा की असली नीति : यूपी कांग्रेस

यूपी कांग्रेस ने अपने एक्स पर लिखा कि निकोबार के जंगलों की बलि, और अडानी की जेब भरना, यही है भाजपा की असली नीति। जननायक राहुल गांधी ने अंडमान-निकोबार की धरती से मोदी सरकार के ‘अडानी प्रेम’ की कलई खोल दी है। 160 वर्ग किलोमीटर के जंगलों को काटकर एक उद्योगपति को सौंपने की साजिश रची जा रही है। अब समझ आया कि सरकार राहुल को यहां आने से क्यों रोकना चाहती थी? जब राजा ‘व्यापारी’ बन जाए, तो प्रजा का जंगल, जमीन और जीवन सुरक्षित नहीं रहता। राहुल गांधी संसद में इस ‘महा-लूट’ के खिलाफ सीना तानकर खड़े होंगे।

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