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‘बारूदी सुरंग मुक्त विश्व’ के लिए एकजुट हुई दुनिया, आज मनाया जा रहा है जागरूकता दिवस

साल 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने आज के दिन का थीम "शांति में निवेश करें, माइन एक्शन में निवेश करें" (Invest in Peace; Invest in Mine Action) रखी है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि बारूदी सुरंगों को हटाना सुरक्षा के साथ - साथ लम्बे समय तक शांति और विकास के लिए भी एक रणनीतिक निवेश है।

By santosh singh 
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संयुक्त राष्ट्र। पूरे विश्व भर में आज ‘अंतर्राष्ट्रीय बारूदी सुरंग जागरूकता और खनन कार्रवाई सहायता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य बारूदी सुरंगों (Landmines) से पैदा होने वाले खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनको समाप्त करने के लिए वैश्विक प्रयासों को रफ़्तार देना है। साल 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने आज के दिन का थीम “शांति में निवेश करें, माइन एक्शन में निवेश करें” (Invest in Peace; Invest in Mine Action) रखी है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि बारूदी सुरंगों को हटाना सुरक्षा के साथ – साथ लम्बे समय तक शांति और विकास के लिए भी एक रणनीतिक निवेश है।

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आज के दिन का महत्व और इतिहास

हर साल 4 अप्रैल को इस दिवस के रूप में मनाने की घोषणा 8 दिसंबर, 2005 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी। इसका उद्देश्य उन देशों में राष्ट्रीय माइन-एक्शन क्षमताओं को विकसित करना है जहाँ युद्ध के अवशेष और सुरंगें नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा हैं।

खतरनाक आंकड़े

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बारूदी सुरंगों के कारण हताहत होने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। 2024 में वैश्विक स्तर पर लगभग 6,279 लोग इन विस्फोटकों का शिकार हुए थे।

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भारत की स्थिति और वैश्विक प्रयास

भारत उन देशों की सूची में शामिल है जो अभी भी एंटी-पर्सनल माइन्स का उत्पादन या अधिग्रहण करने की क्षमता रखते हैं। यहां की सीमावर्ती क्षेत्रों में, विशेषकर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास, अनजाने में सुरंगों की चपेट में आने से नागरिकों के घायल होने की घटना आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

संयुक्त राष्ट्र माइन एक्शन सर्विस (UNMAS) इस तरह के खतरे को खत्म करने के लिए विश्व भर में स्थानीय नायकों और स्पेशलिस्टस के साथ मिलकर इस विषय पर काम कर रही है।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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