भारत में इस्लामिक समिट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी (Maulana Khalilur Rahman Sajjad Nomani) ने कुछ ऐसा कहा जिसने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की हिंदू आबादी में पारंपरिक रूप से शामिल कई समुदायों को हिंदू नहीं माना जाना चाहिए, इस देश में हिंदू बहुसंख्यक नहीं हैं।
नई दिल्ली। भारत में इस्लामिक समिट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी (Maulana Khalilur Rahman Sajjad Nomani) ने कुछ ऐसा कहा जिसने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की हिंदू आबादी में पारंपरिक रूप से शामिल कई समुदायों को हिंदू नहीं माना जाना चाहिए, इस देश में हिंदू बहुसंख्यक नहीं हैं। इसके अलावा क्या कुछ कहा आइए जानते हैं?
नोमानी ने दावा किया कि पिछले 30 वर्षों में पूरे भारत का दौरा करते हुए उन्होंने लोगों की धार्मिक पहचान और विश्वासों पर गहन अध्ययन किया है। अपने भाषण में, मौलाना सज्जाद नोमानी (Maulana Sajjad Nomani) ने तर्क दिया कि भारत के डेमोग्राफिक मेकअप की पारंपरिक समझ मूल रूप से गलत है। उनके एनालिसिस के अनुसार, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह देश भर में तीन दशकों की जमीनी यात्रा और रिसर्च पर आधारित है, अगर अलग-अलग पहचान ग्रुप को अलग से कैलकुलेट किया जाए तो हिंदुओं को मेजोरिटी कम्युनिटी नहीं माना जा सकता।
भारत में इस्लामिक समिट में मौलाना 🇮🇳
"हिंदू अब मेजॉरिटी में नहीं हैं"
"SC + आदिवासी + तमिल + लिंगायत = गैर हिंदू हैं"
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"हमने हिंदुओं को सेक्युलर और फासिस्ट में बांटा, लेकिन दोनों ने हमारे मकसद को नुकसान पहुंचाया"
"JAAT अब कह रहे हैं कि वे हिंदू नहीं हैं" pic.twitter.com/NaOy0bNODd
— Rohit Jain 2.0 (@rohitjain2706) June 18, 2026
इनकी अलग है पहचान
उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति, आदिवासी (आदिवासी समुदाय), सिख, ईसाई, बौद्ध, लिंगायत और तमिलनाडु की आबादी की पूरी तरह से अलग पहचान है जो उन्हें हिंदू धर्म से अलग करती है। मौलवी ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी इस जमीन के असली और सबसे पुराने निवासी हैं, उन्हें हिंदू छत्र के नीचे नहीं रखा जाना चाहिए।
हिंदू नहीं है बहुसंख्यक
इसके अलावा, उन्होंने दावा किया किसी भी हालत में हिंदुओं को मैजोरिटी नहीं माना जा सकता। मैं एक बार फिर दोहराता हूं, सिख हिंदू नहीं हैं, ईसाई हिंदू नहीं हैं, बौद्ध हिंदू नहीं हैं, शेड्यूल्ड कास्ट के लोग हिंदू नहीं हैं, साथ ही साथ कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में लोकल कम्युनिटी की मीटिंग हुई हैं, जहां जाट कम्युनिटी के सदस्यों ने खुद को सिख के तौर पर ऑफिशियली रजिस्टर कराने पर चर्चा की, हालांकि उन्होंने इस दावे को वेरिफाई करने के लिए कोई खास सबूत नहीं दिया।
हमने हिंदुओं को ‘सेक्युलर हिंदू’ और ‘कम्युनल हिंदू’ में बांटा
जिस तरह से हमने हिंदुओं को ‘सेक्युलर हिंदू’ और ‘कम्युनल हिंदू’ में बांटा है, इस बंटवारे ने हमें बहुत धोखा दिया है। पहले, सो-कॉल्ड सेक्युलर हिंदुओं ने हमें नुकसान पहुंचाया, और अब उन्होंने देश को फासिस्ट हिंदुओं को थाली में परोस दिया है। जैसे ही उनका ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लोग तरह-तरह का तर्क देने लगे। उनके बयान पर बहस भी छिड़ी है।
मौलाना के बयान से जाट महासभा में गुस्सा, कहा- बुद्धि कर देंगे ठीक
अखिल भारतीय जाट महासभा के नेता धर्मवीर बालियान ने मौलाना के विवादित बयान पर आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि मौलाना पहले जाटों का इतिहास उठाकर देख लें। धर्मवीर बालियान ने कहा कि मैं तो ये कहूंगा कि मौलाना का दिमाग खराब है, जो व्यक्ति किसी समाज के बारे में ABCD न जानता हो और अपने को अध्यक्ष बता रहा हो। उन्होंने कहा कि मौलाना साहब ने जो शब्द कहे हैं, उसे वापस ले लो और माफी मांग लो।
धर्मवीर बालियान ने कहा कि मौलाना देश और प्रदेश में माहौल बिगाड़ने का काम न करें। इस समय सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा है। 2013 में दंगे हुए थे। उसमें बहुत सारे लोगों के घर बर्बाद हुए थे, वो भी ऐसे ही लोगों ने करवाए थे। मौलाना साहब कह रहे हैं कि मैंने बहुत अध्ययन किया है, तो मौलाना साहब ये अध्ययन अपनी कौम अपने समाज पर कर लो।
मौलाना ही मुसलमान नहीं है, पहले ये अपना सर्टिफिकेट दें : मोनू मलिक
राष्ट्रीय निशानेबाज मोनू मलिक ने कहा कि एक मौलाना द्वारा जाट समाज के ऊपर बयान दिया गया है कि जाट समाज हिन्दू नहीं है, तो क्या मौलाना जाट समाज को सर्टिफिकेट बांटने का काम करेगा। जाट समाज के कितने पुराने इतिहास हैं, इसे बारे में पता करके देखो। मुझे तो ये लगे कि मौलाना ही मुसलमान नहीं है, पहले ये अपना सर्टिफिकेट दें। जाट समाज ने बड़ी-बड़ी लड़ाइयां लड़ी हैं। ये मौलाना धर्म और हिंदू समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।