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मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षणों को पहचान कर बचा सकते हैं आंखों की रोशनी, ये है कारण, लक्षण और बचने के उपाय

मोतियाबिंद की बीमारी में रोशनी कम हो जाती है और तेज रोशनी में देखने में दिक्कत होती है। पास की चीजें धुंधली नजर आने लगती है। अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाय तो आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है।

मोतियाबिंद की बीमारी में रोशनी कम हो जाती है और तेज रोशनी में देखने में दिक्कत होती है। पास की चीजें धुंधली नजर आने लगती है। अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाय तो आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है।

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मोतियाबिंद बीमारी में आंख के लेंस का धुंधला होने लगता है, जिससे आंखों की रोशनी कमजोर होती है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली एक सामान्य समस्या है, लेकिन कुछ अन्य कारक भी इसे प्रभावित कर सकते हैं। मोतियाबिंद के लक्षणों में धुंधला दिखाई देना, रात में देखने में परेशानी, और रंगों का फीका दिखाई देना शामिल है। मोतियाबिंद का इलाज आमतौर पर सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, जिसमें धुंधले लेंस को हटाकर उसकी जगह एक कृत्रिम लेंस लगाया जाता है।

मोतियाबिंद के कारण:

मोतियाबिंद के कई कारण हो सकते हैं। बढ़ती उम्र में मोतियाबिंद होना आम कारण है। डायबिटीज के मरीजों को भी मोतियाबिंद होने का खतरा रहता है। इसके अलावा आंख की चोट से लेंस को नुकसान हो सकता है।

मोतियाबिंद के लक्षण:

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मोतियाबिंद के लक्षणों में शामिल हैं:
आस पास की चीजें धुंधली दिखाई देना
रात में देखने में परेशानी
रंगों का फीका दिखाई देना

मोतियाबिंद का इलाज:

मोतियाबिंद का इलाज आमतौर पर सर्जरी के माध्यम से किया जाता है। सर्जरी में धुंधले लेंस को हटाकर उसकी जगह एक कृत्रिम लेंस लगाया जाता है।
मोतियाबिंद से बचने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच कराना चाहिए। इससे मोतियाबिंद प्रारंभिक चरण में पता चल सकता है।
मोतियाबिंद से बचने के लिए घर से बाहर आंखों पर सनग्लासेस जरुर लगाएं। जिससे आंखें हानिकारक सूर्य की किरणों से बची रहेंगी।
डायबिटीज और हाईबीपी को नियंत्रित रखें।

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