व्रत ,उपवास और पर्व के दृष्टिकोण से आषाढ़ का महीना बहुत पुनीत माना जाता है। यह मास हिंदू पंचांग का चौथा महीना है जो आमतौर पर जून और जुलाई के बीच पड़ता है।
Ashadh Month 2026 : व्रत ,उपवास और पर्व के दृष्टिकोण से आषाढ़ का महीना बहुत पुनीत माना जाता है। यह मास हिंदू पंचांग का चौथा महीना है जो आमतौर पर जून और जुलाई के बीच पड़ता है। वैदिक ग्रंथों और संहिताओं में आषाढ़ के महीने को ‘शुचि मास’ कहा गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के काल से ही इस समय को ऋतु परिवर्तन, कृषि की तैयारी और आंतरिक शुद्धता (तप) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड माना गया है।
दक्षिणायन की शुरुआत
इस महीने में भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस महीने में देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा समेत कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। आषाढ़ मास में सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है, जिससे दक्षिणायन की शुरुआत होती है।
दक्षिणायन देवताओं की रात्रि का समय
वैदिक काल गणना के अनुसार, दक्षिणायन देवताओं की रात्रि का समय माना जाता है।
सूर्य देव की उपासना के लिए पवित्र
साल 2026 में आषाढ़ का महीना 30 जून 2026, मंगलवार से शुरू होकर 29 जुलाई 2026, बुधवार तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का चौथा महीना होता है, जो भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है।
आषाढ़ माह 2026 के व्रत-त्योहार
30 जून- आषाढ़ माह की शुरुआत
3 जुलाई- संकष्टी चतुर्थी
10 जुलाई- योगिनी एकादशी
12 जुलाई- मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
14 जुलाई- आषाढ़ अमावस्या
16 जुलाई- जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति
25 जुलाई- देवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी
26 जुलाई- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 जुलाई- गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत