बाबा नीम करौली के भक्त बाबा के चमत्कार में विश्वास करते हैं। पूरी दुनिया में बाबा नीम करौली के भक्त है। मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से बाबा आश्रम जाता है या उनके बारे में पढ़ता है, उसे बाबा की मौजूदगी का अहसास होता है। अगर आप भी अपने जीवन में शांति और सही रास्ता खोजना चाहते हैं, तो 'मिरेकल ऑफ लव' जैसी पुस्तकें पढ़ना आज से ही शुरू करें।
Baba Neem Karoli : बाबा नीम करौली के भक्त बाबा के चमत्कार में विश्वास करते हैं। पूरी दुनिया में बाबा नीम करौली के भक्त है। मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से बाबा आश्रम जाता है या उनके बारे में पढ़ता है, उसे बाबा की मौजूदगी का अहसास होता है। अगर आप भी अपने जीवन में शांति और सही रास्ता खोजना चाहते हैं, तो ‘मिरेकल ऑफ लव’ जैसी पुस्तकें पढ़ना आज से ही शुरू करें। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजिस्ट और प्रोफेसर डॉ. रिचर्ड अल्बर्ट (Dr. Richard Alpert) जब 1967 में भारत यात्रा के दौरान उत्तराखंड के कैंची धाम (Kainchi Dham) में नीम करौली बाबा (महाराज-जी) से मिले, तो उनका अहंकार पूरी तरह टूट गया और उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया. बाबा ने उन्हें नया नाम ‘रामदास’ (Ram Dass) दिया, जिसका अर्थ है ‘भगवान का सेवक
मन की बात जान लेना (The form of the Indweller)रिचर्ड अल्बर्ट इंसानी दिमाग और चेतना (Consciousness) को समझने भारत आए थे। वे भारतीय साधु-संतों को लेकर काफी संशयी (Skeptical) थे। लेकिन जब वे नीम करौली बाबा से मिले, तो बाबा ने उनके सामने सीधे उनकी मृत मां का जिक्र किया और बताया कि वे पिछली रात तारों को देखकर अपनी मां के बारे में क्या सोच रहे थे। यह बात रिचर्ड ने किसी को नहीं बताई थी। वैज्ञानिक सोच वाले रिचर्ड यह देखकर स्तब्ध रह गए और रो पड़े।
रिचर्ड अल्बर्ट उस समय चेतना के विस्तार के लिए एलएसडी (LSD) जैसी दवाओं पर रिसर्च कर रहे थे। उन्होंने बाबा की परीक्षा लेने या उनके विचार जानने के लिए उन्हें LSD की भारी खुराक (आम खुराक से लगभग 9 गुना ज्यादा) दी। बाबा ने वो दवाइयां खा लीं, लेकिन उनके शरीर या दिमाग पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं हुआ। बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा कि ध्यान के माध्यम से इस अवस्था में हमेशा रहा जा सकता है, इसके लिए किसी दवाई की जरूरत नहीं है।
रिचर्ड’ से ‘बाबा रामदास’ बनने का सफरइस मुलाकात के बाद रिचर्ड अल्बर्ट ने प्रोफेसर की नौकरी और पश्चिमी चकाचौंध को पीछे छोड़ दिया। वे बाबा के अनन्य शिष्य बन गए। भारत से वापस अमेरिका लौटकर उन्होंने 1971 में एक ऐतिहासिक किताब लिखी, जिसका नाम था ‘Be Here Now’. इस किताब ने पश्चिमी दुनिया के लाखों लोगों को योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिकता (Indian Spirituality) से जोड़ा।
उन्हीं से प्रेरणा पाकर बाद में एप्पल (Apple) के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां भी नीम करौली बाबा के आश्रम कैंची धाम पहुंची थीं। बाबा रामदास का निधन साल 2019 में हुआ, लेकिन वे आज भी पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति को फैलाने वाले सबसे बड़े चेहरों में गिने जाते हैं।