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Akhand Jyoti in Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से जीवन का अंधेरा छंट जाता है, जानें दीप प्रज्वलित करने का सही तरीका

मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व शारदीय नवरात्रि को जीवन में प्रकाश और शक्ति का दुर्लभ अवसर माना जाता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Akhand Jyoti in Sharadiya Navratri :  मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व शारदीय नवरात्रि को जीवन में प्रकाश और शक्ति का दुर्लभ अवसर माना जाता है। नौ दिवसीय इस विशेष उपासना पर्व में मां दुर्गा के भक्त कठिन नियमों का पालन कर मां से ज्ञान, भक्ति और समृद्धि का वरदान मांगते है। सनातन धर्म शास्त्रों में नवरात्रि के नौ दिनों की विशेष महिमा बतायी गई है। मान्यता है नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा भूलोक पर निवास करती हैं और वातावरण में विशेष अध्यात्मिक शक्ति का प्रभाव दिखाई देता है।

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इस दौरान सनातन धर्मियों के घरों में विशेष साफ सफाई और मां दुर्गा के आगमन पर अखंड ज्योति को प्रकाशित किया जाता है। नवरात्रि के दौरान प्रथम दिवस को घटस्थापना के समय अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का नियम है। नवरात्रि में अखंड ज्योति का अर्थ है नौ दिनों तक लगातार जलने वाली दीपक की लौ, जो ज्ञान, शक्ति और माँ दुर्गा की कृपा का प्रतीक है।

नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने के नियम
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने के लिए मां दुर्गा के चित्र के सामने  पीतल या मिट्टी का दीपक में घी या तिल के तेल से रुई की बत्ती बनाकर मंत्र पढ़कर दीप प्रज्वलित करने का नियम है।

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन: दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते।। 

मंत्र का जाप करना शुभ होता है।

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दीपक को जौ, चावल या गेहूं के ऊपर रखें.घी का दीपक दुर्गा के दाहिनी ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखें, और ज्योति को 9 दिनों तक जलता रहने दें।  और खुद बुझने दें।

 दीपक को अकेला न छोड़ें :  ज्योति को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और न ही घर में ताला लगाना चाहिए।

 दीपक की बत्ती बदलना : बार-बार बत्ती न बदलें, यदि बदलना पड़े तो उसके लिए एक अलग छोटे दीपक में लौ जलाकर रखें और उसे अलग रखें।

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