14 सितम्बर 2025 का राशिफलः रविवार का राशिफल आचार्य रत्नाकर तिवारी से जानिए, मिथुन राशि के लोगों का आज का दिन व्यस्तता से भरा रहेगा। मेष – आज का दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। आज परिवार का सहयोग मिलेगा। वृषभ –
14 सितम्बर 2025 का राशिफलः रविवार का राशिफल आचार्य रत्नाकर तिवारी से जानिए, मिथुन राशि के लोगों का आज का दिन व्यस्तता से भरा रहेगा। मेष – आज का दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। आज परिवार का सहयोग मिलेगा। वृषभ –
13 सितम्बर 2025 का राशिफलः शनिवार का राशिफल आचार्य रत्नाकर तिवारी से जानिए, मिथुन राशि के लोगों का आज का दिन रहेगा शुभ… मेष – आज वैवाहिक जीवन में तनाव और साझेदारों से मतभेद हो सकते हैं। आज सावधानी बरतें और समझदारी से काम लें। वृषभ – आज मानसिक शांति
12 सितम्बर 2025 का राशिफलः शुक्रवार का राशिफल आचार्य रत्नाकर तिवारी से जानिए, मिथुन राशि के लोगों का दिन आज उत्साह से भरा रहेगा। मेष – आज कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और अधूरे काम पूरे होंगे। परिवार में सौहार्द बना रहेगा। निवेश सोच-समझकर करें। वृषभ
Devuthani Ekadashi 2025 : देवउठनी एकादशी का पर्व धीरे धीरे करीब आता जा रहा है। चार महीने के चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु योग निद्रा से उठेंगे। इसके पहले जब देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के बाद सभी प्रकार सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर
Budh Gochar 2025 : ग्रहों के राजकुमार बुधदेव गोचर करने वाले है। बुद्धि और ज्ञान के प्रदाता बुधदेव 15 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, संचार, व्यापार और तर्क-वितर्क का देवता माना जाता है। बुध देव के गोचर से कुछ राशियों में शुभ
Sharad Purnima 2025 : शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु और चंद्र देव की विधिविधान से पूजा की जाती है। शरद पूर्णिमा के महत्व के बारे में कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता
11 सितम्बर 2025 का राशिफलः गुरुवार का राशिफल आचार्य रत्नाकर तिवारी से जानिए, सिंह राशि के लोगों का आज का दिन उत्तम रहेगा। मेष – आज नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं। आज थोड़ा तनाव महसूस हो सकता है। आज अपने स्वास्थ्य पर ध्यान बनाए रखें। वृषभ – आज
Pitru Visarjan 2025 : सनातनधर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा भक्ति का भव रखने की परंपरा है। युगों युगों से सनातनधर्मी पितरों की स्मृति में तर्पण , श्राद्ध, और पिंडदान किया जाता है। इसी प्रकार पितृ विसर्जन एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आए पूर्वजों
Vishwakarma Puja 2025 : ब्रह्मांड के अद्भुत वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की हर साल 17 सितंबर को मनायी जाती है। यह त्योहार शिल्पकारों,कारीगरों , निर्माणकर्ताओं, इंजीनियरों के सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन रचनात्मक कार्य करने वाले लोग अपने औजार, उपकरण और कार्यस्थल की विधि विधान से पूजा करते है।
Pitru Paksha 2025 : पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और विश्वास का कालखंड है। इस दौरान पितरों के निमित्त तर्पण ,पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष में पितरों की कृपा और आर्शिवाद प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। पितृपक्ष की
Pitru Paksha 2025 : सनातन धर्म में पूर्वजों की आत्मा के शान्ति के लिए विधि विधान से श्राद्ध कर्म करने की परंपरा युगों युगों से चलती आ रही है। मृत हुए पूर्वज को पितृ कहते है। मान्यता है कि पूर्वज गो लोक से अपने वंशजों को सुखी रहने का आर्शिवाद
Pitru Paksha 2025 : सनातन धर्म में पितृ पक्ष विशेष महत्व है। पितृ पक्ष की समयावधि में तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष के समय में पितरों के लिए तर्पण किया जाता है। पितृ पक्ष या श्राद्ध 16 दिनों के होते हैं। पंचांग के अनुसार
Pitru Paksha 2025 : सनातन परंपरा में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक का समय पितृ पक्ष कहलाता है। आज पितृपक्ष की प्रतिपदा का श्राद्ध किया जाएगा। इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। पौराणिक ग्रथों
Spiritual Leader Dalai Lama : तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा (Tibetan religious leader Dalai Lama) मंगलवार को करीब डेढ़ माह के लद्दाख प्रवास के बाद धर्मशाला स्थित अपने स्थायी निवास पर लौट आए। दिल्ली से गगल एयरपोर्ट (Gaggal Airport) पंहुचने पर निर्वासित तिब्बती सरकार (Tibetan government-in-exile) के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में
Pitru Paksha 2025 Sarvapitri Amavasya : सनातन धर्म में पितरों के आत्मा की शांति के लिए तप्रण , श्राद्ध, और पिंडदान किया जाता है। पिंडदान से पितरों को मोक्ष, शांति, और तृप्ति प्राप्त होती है, जिससे वे प्रसन्न होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और वंश में सुख-समृद्धि आती है।