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ड्रैगन ने थामा ईरान का हाथ, ट्रंप और नेतन्याहू की टेंशन बढ़ना तय, जानिए क्या है चीन का ‘प्लान बी’

अमेरिका ने वेनेजुएला (Venezuela)  में बड़ा खेल करते हुए निकोलस मादुरो (Nicholas Maduro) को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ​ ही वहां के तेल पर अपना कब्जा भी जमा लिया, लेकिन चीन (China) ने इसका ऐसा तोड़ निकाला है जिससे अमेरिका (USA) और इजरायल (Israel) की टेंशन बढ़नी तय है।

By santosh singh 
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बीजिंग। अमेरिका ने वेनेजुएला (Venezuela)  में बड़ा खेल करते हुए निकोलस मादुरो (Nicholas Maduro) को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ​ ही वहां के तेल पर अपना कब्जा भी जमा लिया, लेकिन चीन (China) ने इसका ऐसा तोड़ निकाला है जिससे अमेरिका (USA) और इजरायल (Israel) की टेंशन बढ़नी तय है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli PM Benjamin Netanyahu) जिस ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, अब उसी ईरान का खजाना चीन भरने जा रहा है। चीन की इंडिपेंडेंट रिफाइनरीज (China’s Independent Refineries) ने अब वेनेजुएला (Venezuela) के तेल की भरपाई के लिए ईरान की तरफ रुख करने की पूरी तैयारी कर ली है।

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दरअसल, अमेरिका ने वेनेजुएला (Venezuela)  की नई सरकार के साथ डील कर ली है कि वहां का कच्चा तेल अब अमेरिका जाएगा। ट्रंप ने खुद बताया कि करीब 2 अरब डॉलर का तेल अमेरिका भेजा जाएगा। इसका सीधा असर चीन पर पड़ा है, क्योंकि चीन वेनेजुएला से भारी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन चीन रुकने वाला नहीं है। मार्केट के जानकारों और ट्रेडर्स ने खुलासा किया है कि वेनेजुएला से तेल सप्लाई बंद होते ही चीनी रिफाइनरीज ने अपना पूरा फोकस ईरान और रूस पर शिफ्ट कर दिया है।

इसकी दो वजह हैं

पहला ईरानी हैवी क्रूड इस समय बाजार में सबसे सस्ता और बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। दूसरा वेनेजुएला के तेल की किल्लत होते ही, ईरान अपना तेल इंटरनेशन बेंचमार्क (ब्रेंट) से करीब 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता बेच रहा है। चीन के लिए यह फायदे का सौदा है।

ट्रंप की चाल उन्हीं पर भारी?

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स्पार्टा कमोडिटीज की एनालिस्ट जून गोह का कहना है, वेनेजुएला का पूरा ड्रामा चीन की प्राइवेट रिफाइनरीज को चोट पहुंचाएगा, लेकिन बाजार में रूसी और ईरानी तेल की भरमार है। इसलिए चीन को डरने की जरूरत नहीं है, वे बस अपना सप्लायर बदल लेंगे। यही बात ट्रंप और नेतन्याहू को परेशान कर सकती है। अमेरिका ने वेनेजुएला से चीन का पत्ता तो काट दिया, लेकिन अनजाने में उसने चीन को ईरान की झोली में डाल दिया। अब चीन जो पैसा वेनेजुएला को देता था, वह पैसा ईरान के पास जाएगा। ईरान पर प्रतिबंध लगाकर उसे कमजोर करने की अमेरिकी कोशिशों को इससे बड़ा झटका लगेगा।

मार्च-अप्रैल में दिखेगा असली असर

केप्लर के डेटा के मुताबिक, चीन के पास अभी जहाजों पर वेनेजुएला का इतना तेल मौजूद है कि अगले 75 दिनों तक उसकी गाड़ियां दौड़ती रहेंगी। लेकिन मार्च और अप्रैल आते-आते यह स्टॉक खत्म हो जाएगा. केप्लर की सीनियर एनालिस्ट जू मुयू के मुताबिक, ठीक इसी समय चीनी रिफाइनरीज पूरी तरह से ईरानी और रूसी तेल पर शिफ्ट हो जाएंगी।

कनाडा और इराक भी कतार में, लेकिन ईरान सबसे आगे

हालांकि, चीन के पास कनाडा, ब्राजील और इराक से तेल लेने का विकल्प भी है। कनाडाई तेल पर भी छूट मिल रही है क्योंकि अमेरिका में मांग कम होने की उम्मीद है, लेकिन चीन के ‘टीपॉट’ रिफाइनरीज के लिए ईरानी तेल की केमिस्ट्री और इकोनॉमिक्स सबसे ज्यादा फिट बैठती है। कुल मिलाकर, वाशिंगटन ने सोचा था कि वेनेजुएला पर कब्जा करके वह सप्लाई चेन अपने हाथ में ले लेगा, लेकिन ड्रैगन (चीन) ने अपनी नई प्लानिंग से ईरान की चांदी कर दी है।

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