पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनते ही शुभेंदु अधिकारी ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। इसके साथ ही कई मामलों की जांच के निर्देश दिए हैं। अब उन्होंने पिछली ममता सरकार के दौरान जारी किए गए सभी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनते ही शुभेंदु अधिकारी ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। इसके साथ ही कई मामलों की जांच के निर्देश दिए हैं। अब उन्होंने पिछली ममता सरकार के दौरान जारी किए गए सभी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है। पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग विकास विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया कि वे वर्ष 2011 से 2026 तक जारी किए गए एससी, एसटी और ओबीसी प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन करें। यह अवधि पूर्व सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के तीन कार्यकालों से जुड़ी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट की माने तो, जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि, यदि कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओबीसी या अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र हासिल किया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि, पिछले 15 वर्षों में कुल 1.69 करोड़ सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इनमें लगभग 1 करोड़ एससी प्रमाणपत्र, 21 लाख एसटी प्रमाणपत्र और 48 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि, ये जांच इसलिए कि जा रही है कि, कोई भी व्यक्ति गलत प्रमाण पत्र के जरिए आरक्षण जैसी सुविधाओं का लाभ न उठा सके। इसके साथ ही, कुछ प्रमाणपत्र जारी करने में अनियमितता की भी शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं।