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बीजेपी विधायक प्रेम सागर पटेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में शिकायत, उप लोकायुक्त ने 25 नवंबर तक मांगा स्पष्टीकरण

यूपी के महाराजगंज जिले की विधानसभा सीट 317 (सिसवा) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक प्रेम सागर पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और चुनावी हलफनामे में वास्तविक वित्तीय विवरण छिपाने के गंभीर आरोपों के तहत, उत्तर प्रदेश उप लोक आयुक्त कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

By santosh singh 
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लखनऊ/महाराजगंज। यूपी के महाराजगंज जिले की विधानसभा सीट 317 (सिसवा) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक प्रेम सागर पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और चुनावी हलफनामे में वास्तविक वित्तीय विवरण छिपाने के गंभीर आरोपों के तहत, उत्तर प्रदेश उप लोक आयुक्त कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। उप लोक आयुक्त सचिव डॉ. रीमा बंसल के तरफ से जारी आधिकारिक पत्र (संख्या-2404-2025/10) के माध्यम से विधायक प्रेम सागर पटेल को निर्देशित किया गया है कि वे इस पूरे प्रकरण पर अपने दोषारोपण के संबंध में सुसंगत अभिलेखों एवं शपथ पत्र के साथ 25 नवंबर 2026 से पूर्व अपनी तथ्यात्मक आख्या हर हाल में प्रस्तुत करें।

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरी कार्रवाई जनपद कुशीनगर (ग्राम बमनौली, मठियाधीर) के निवासी मुकेश (पुत्र श्री मैनेजर) द्वारा उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उपलोक आयुक्त अधिनियम, 1975 की सुसंगत धाराओं के तहत दर्ज कराए गए एक परिवाद (शिकायत संख्या: Complaint No. 106 of 2024) के आधार पर की जा रही है। शिकायतकर्ता मुकेश ने 18 जनवरी 2024 को आधिकारिक चालान (संख्या-AH05834) जमा कर विधायक के खिलाफ ठोस दस्तावेजों के साथ मोर्चा खोला था।

चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाना

परिवाद के अनुसार, विधायक प्रेम सागर पटेल ने वर्ष 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए अपने नामांकन पत्रों व शपथ पत्रों में वास्तविक आय को छिपाया। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2016-17 और 2020-21 के वित्तीय विवरणों में हेराफेरी कर अपनी व अपने परिवार की वास्तविक हैसियत को बहुत कम दिखाया।

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करोड़ों की बेनामी संपत्तियां व प्लाट

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच विधायक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने, अपनी पत्नी, पुत्र और बहू के नाम पर करोड़ों रुपये की रजिस्ट्री और बेनामी आवासीय प्लाट व जमीनें खरीदीं, जिनका जिक्र उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे के खातों में नहीं किया।

ठेकेदारी में पारिवारिक संलिप्तता

आरोप है कि प्रांतीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग (PWD) महाराजगंज के कार्यालय में विधायक ने अपने प्रभाव से अपने पुत्र अंकुर के नाम पर संचालित फर्मों (मेसर्स अंकुर इण्टरप्राइजेज और अंकुर इन्फ्रास्ट्रक्चर) तथा अपनी पत्नी के नाम पर संचालित ‘मेसर्स पी०एस० ट्रेडिंग कम्पनी’ को पार्टनरशिप के जरिए करोड़ों के सरकारी ठेके दिलाए, जिसे पूरी तरह गोपनीय रखा गया।

फर्जी ट्रस्ट के जरिए अवैध उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग

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शिकायत के अनुसार, विधायक ने भोले-भाली जनता को गुमराह कर 31 जुलाई 2015 को ‘सरदार पटेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन ट्रस्ट’ नाम की एक तथाकथित संस्था पंजीकृत कराई। आरोप है कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल पूरी तरह से अवैध धन उगाही के लिए एक “मोहरे” के रूप में किया जा रहा है। इस ट्रस्ट के नाम पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की गोरखपुर शाखा और हनुमानगढ़ी (महाराजगंज) शाखा में खाते खोलकर भारी वित्तीय हेराफेरी की जा रही है, जिससे विधायक और उनका परिवार लगातार अपनी अचल संपत्तियां बढ़ा रहा है।

लोक आयुक्त कार्यालय ने इसे ‘आय से अधिक संपत्ति और गंभीर भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में माना

शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए बैनामों की प्रमाणित प्रतियों, बैंक खातों के विवरण और वित्तीय चार्ट्स का संज्ञान लेते हुए लोक आयुक्त कार्यालय ने इसे ‘आय से अधिक संपत्ति और गंभीर भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में माना है। पूर्व में सचिव राजेश कुमार द्वारा 08 फरवरी 2024 को जारी नोटिस के बाद, अब उप लोक आयुक्त कार्यालय ने अंतिम कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक प्रेम सागर पटेल को 25 नवंबर 2026 तक अपनी सफाई व सबूत पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।

शिकायतकर्ता मुकेश ने लोक आयुक्त से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय विशेष जांच एजेंसी (जैसे विजिलेंस या ईओडब्ल्यू) से कराई जाए ताकि सत्ता के रसूख के पीछे छिपे इस बड़े वित्तीय घोटाले का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके। इस मामले में शिकायतकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी परिवाद दायर किया, जिसकी सुनवाई दिनांक: 27 अक्टूबर 2026 को होनी है।

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