प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिप्लोमेसी में इन दिनों सिर्फ बातचीत और मुलाकातें ही नहीं, बल्कि भारतीय खाने का स्वाद भी बड़ा किरदार निभा रहा है।
Gala Dinner: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS Summit का आयोजन हो रहा है। भारत मंडपम में दुनिया के कई बड़े नेता जुटे हैं और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से विदेशी मेहमानों के लिए खास Gala Dinner का आयोजन किया गया।
इस डिनर में मेहमानों को भारत के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। मेन्यू में लखनवी गलौटी कबाब, नल्ली निहारी, चिकन कोरमा, कश्मीरी पुलाव और हैदराबादी बिरयानी जैसे व्यंजन शामिल रहे। वहीं अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक स्नैक्स के जरिए भी भारत की क्षेत्रीय विविधता दिखाई गई। महाराष्ट्र की भाकरवड़ी, राजस्थान की मिनी कचौड़ी, बंगाल की कुचो निमकी, तमिलनाडु का मुरुक्कू और कश्मीरी अखरोट जैसे व्यंजन भी खास मेन्यू का हिस्सा रहे।
यानी विदेशी मेहमानों के सामने सिर्फ खाना नहीं पूरा भारत एक थाली में पेश किया गया। लेकिन BRICS में Food Diplomacy की कहानी सिर्फ डिनर टेबल तक सीमित नहीं है। विदेशी मेहमानों के लिए तैयार की गई खास वेलकम किट में बिहार का मखाना और सत्तू भी शामिल किया गया। करीब 1,500 खास हैंपर तैयार किए गए, जिनमें पूर्णिया का मखाना अलग-अलग फ्लेवर में और पटना के फतुहा का जलजीरा फ्लेवर वाला सत्तू शामिल रहा। यानी बिहार के वो उत्पाद, जिन्हें अब तक मुख्य रूप से स्थानीय पहचान मिली थी अब ग्लोबल डिप्लोमेसी के मंच तक पहुंच रहे हैं। और ये पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने खाने को कूटनीति से जोड़ा हो।

जून 2026 में स्लोवाकिया दौरे के दौरान पीएम मोदी ने वहां के स्पीकर रिचर्ड राशी को बिहार का पारंपरिक ठेकुआ गिफ्ट किया था। छठ से जुड़ा ये पारंपरिक पकवान यूरोप तक पहुंचा और बिहार की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनकर सामने आया। इसी तरह मई में इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी गिफ्ट की थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और मोदी-मेलोनी के नाम को जोड़कर ‘Melodi’ शब्द भी खूब चर्चा में आया।


वहीं 2023 के G20 Summit में भी भारतीय मिलेट्स, पारंपरिक व्यंजन और स्ट्रीट फूड के जरिए दुनिया को भारत के स्वाद से रूबरू कराया गया था। रागी डोसा, बाजरा, मखाना, गोलगप्पे और समोसे जैसे व्यंजनों के जरिए दुनिया को भारत की खान-पान की विविधता दिखाई गई।
दरअसल, इसे ही Food Diplomacy या Culinary Diplomacy कहा जाता है। किसी देश की भाषा, संगीत और कला की तरह उसका खाना भी उसकी पहचान होता है। और जब किसी विदेशी नेता को ठेकुआ, मखाना, सत्तू या भारतीय मिठाई गिफ्ट की जाती है या फिर दुनिया के बड़े नेताओं को भारतीय व्यंजन परोसे जाते हैं तो उसके पीछे संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का संदेश भी होता है। यानी मेलोडी से शुरू हुई मिठास ठेकुए तक पहुंची और अब मखाना-सत्तू तक आ गई। प्रधानमंत्री मोदी की डिप्लोमेसी में अब बातचीत के साथ-साथ भारतीय स्वाद भी अपनी जगह बना रहा है।