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Gatashram Tila : गताश्रम टीला पर प्रभु श्रीकृष्ण ने दूर किया थकान , कृष्ण द्वारा रची गई लीला के पक्के सबूत हैं

लीलाधारी भगवान कृष्ण की कथाओं में भक्त और भगवान के मधुर मिलन की अनेक कएं मिलती है। गोकल , बरसाना ,मथुरा और द्वारका में प्रभु श्रीकृष्ण ने लीलाएं की है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Gatashram Tila : लीलाधारी भगवान कृष्ण की कथाओं में भक्त और भगवान के मधुर मिलन की अनेक कएं मिलती है। गोकल , बरसाना ,मथुरा और द्वारका में प्रभु श्रीकृष्ण ने लीलाएं की है। प्रभु के लीलाओं के प्रमाण कलयुग में देखने को मिलते है। इसी क्रम में मथुरा के गताश्रम टीला का महत्व आज भी वैसे है जैसे वह पहले था।।

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गताश्रम टीला मथुरा के विश्राम घाट के पास स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ कृष्ण कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद अपना श्रम (थकान) दूर किया था। इसे गताश्रम नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

विश्राम घाट का महत्व: गताश्रम टीला विश्राम घाट के क्षेत्र में आता है, जहाँ मथुरा की परिक्रमा शुरू और समाप्त होती है। यहाँ शाम की यमुना आरती बहुत प्रसिद्ध है।विश्राम घाट मथुरा जंक्शन से लगभग 4 किमी की दूरी पर है, और यह स्थान भक्तों के लिए स्नान व पूजा का पवित्र स्थल है।

पौराणिक ग्रथों में गताश्रम टीला
पौराणिक महत्व: मथुरा में गताश्रम नारायण का मंदिर रामायण और महाभारत काल से संबंधित माना जाता है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण के लीला अवशेष माने जाते हैं। यह स्थान मथुरा के प्रसिद्ध टीलों में से एक माना जाता है, जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित पुरातत्व अवशेष मिले हैं।

1917 में गताश्रम नारायण मंदिर क्षेत्र में खुदाई के दौरान एक अत्यंत प्राचीन शिलापट (stone slab) मिला था। यह भारत में श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित सबसे प्राचीन पुरातात्विक प्रमाणों में से एक माना जाता है।

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शिलापट का वर्णन: इस शिलापट में वासुदेव जी द्वारा टोकरी में भगवान श्रीकृष्ण को ले जाते हुए दृश्य को उकेरा गया है। इसमें यमुना पार करते समय कालिया नाग को वर्षा से रक्षा करते हुए दिखाया गया है।

कुषाण कालीन साक्ष्य: डॉ. एसपी सिंह (उपनिदेशक, राजकीय संग्रहालय मथुरा) के अनुसार, गताश्रम से प्राप्त प्रतिमाएं कुषाण काल की हैं और लगभग 2000 वर्ष से अधिक पुरानी हैं।अन्य

प्राचीन अवशेष: गताश्रम टीले से मिले एक अन्य शिलापट में गोवर्धनधारी कृष्ण (गोवर्धन पर्वत उठाए हुए) का दृश्य भी दिखाया गया है, जो इस स्थान को भगवान कृष्ण की लीलाओं से सीधे जोड़ता है।

 

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