हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है।
Hartalika Teej 2026 : हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है। सनातन परंपरा में इसे सुहाग की रक्षा और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक माना गया है। हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।
हरतालिका तीज का पौराणिक महत्व
माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन नदी के तट पर रेत (बालू) से शिवलिंग बनाया और रातभर जागकर भगवान शिव की स्तुति की। उनकी इस अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी (पत्नी) के रूप में स्वीकार किया।
अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए किया जानें वाला हरतालिका तीज व्रत पंचांग के अनुसार, इससाल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 बजे होगा. उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा।
पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना भी इस पूजा का हिस्सा माना जाता है। इसमें मेहंदी, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर जैसी चीजें शामिल की जा सकती है।