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गणतंत्र दिवस पर डॉ प्रियंका मौर्य ने स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन, कहा-उनका त्याग हमें सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और सेवा ही सच्चा धर्म

आज हम उन अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं, जिन्होंने अपने सपनों, सुख और जीवन तक का बलिदान देकर हमें स्वतंत्र भारत दिया। साथ ही, मातृभूमि की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले हमारे वीर सैनिकों और शहीदों को नमन करती हूं। उनका त्याग हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और सेवा ही सच्चा धर्म है।

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्य ने देशवासियों को पत्र लिखा है। इसमें लिखा कि, भारत के गौरवशाली गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को हृदय से शुभकामनाएं। यह दिन केवल तिरंगे को सलामी देने का नहीं, बल्कि उन मूल्यों को आत्मसात करने का है जिन पर हमारा राष्ट्र खड़ा है-संविधान, समानता, न्याय और मानवीय गरिमा।

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उन्होंने आगे लिखा, आज हम उन अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं, जिन्होंने अपने सपनों, सुख और जीवन तक का बलिदान देकर हमें स्वतंत्र भारत दिया। साथ ही, मातृभूमि की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले हमारे वीर सैनिकों और शहीदों को नमन करती हूं। उनका त्याग हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और सेवा ही सच्चा धर्म है।

26 जनवरी 1950 को लागू हुआ हमारा संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और यह स्पष्ट संदेश देता है कि नारी सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर किसी भी सशक्त समाज की पहचान हैं। एक होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में मेरा प्रयास रहा है कि समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सके, और राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में यह मेरा सतत संकल्प है कि प्रत्येक महिला को न्याय, सम्मान और सुरक्षा का अधिकार मिले।

मेरा दृढ़ विश्वास है कि स्वस्थ नागरिक, जागरूक समाज और सशक्त महिलाएं- यही मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। जब एक महिला सुरक्षित और आत्मनिर्भर होती है, तो पूरा परिवार, समाज और राष्ट्र प्रगति करता है। आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि हम संविधान की आत्मा को अपने आचरण में उतारेंगे, सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध आवाज़ उठाएंगे और एक ऐसे भारत के निर्माण में सहभागी बनेंगे जहां हर नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर प्राप्त हों।

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