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ऐतिहासिक तीर्थस्थल बना कब्रिस्तान, बाणगंगा में पितृपक्ष में हजारों मछलियों की मौत का सच

मुंबई के वालकेश्वर में स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा सरोवर, वही तालाब जिसे लोग बहुत ही पवित्र मानते हैं, उसी तालाब की सतह पर हजारों मरी हुई मछलियों का वीडिओ सामने आया है जो की अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है ।

By Kalpna Pandey 
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Mumbai: मामला मुंबई के वालकेश्वर इलाके में स्थित ऐतिहासिक बंगंगा टैंक का है, जहां पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और दूसरे धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं। इन रस्मों के दौरान पानी में आटे के पिंड, दूध, तेल, मिठाइयां और फूल जैसी पूजन सामग्री विसर्जित की जाती है। लेकिन यही रस्में हजारों जीवों की मौत का कारण बन गयी, क्यों ?क्योंकि पितृपक्ष में आस्था के नाम पर दूध डाला गया, तेल डाला गया, फूल डाले गए, अगरबत्ती, धूप, आटे के पिंड सब कुछ पानी में विसर्जित कर दिया गया।

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पिंडदान साम्रग्री ने रोकी हजारों मछलियों की सासें

परिणाम, पानी की सतह पर तेल की परत बन गई, ऑक्सीजन अंदर नहीं जा सकी, पानी सड़ने लगा और हजारों जलजीव दम घुटने से मर गए। ठीक है हम तो धर्म कर रहे हैं, आस्था कर रहे हैं, लेकिन जरा बताइए जब आप अपने पूर्वजों के नाम पर पानी में जहर घोल रहे हैं, इतने बेजुबान , छोटे जीवों की दम घुटने से मौत हो गयी फिर यहां तो आस्था पाप में बदल गया न ।

घटना के बाद होश में आया सिस्टम

इस घटनाक्रम के बाद समस्या को रोकने के लिए अब बृहन्मुंबई नगर निगम ने पुजारियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक बुलाई। साथ ही, तालाब की सफाई बढ़ाई जा रही है और पानी में ऑक्सीजन का स्तर सुधारने के लिए पंप लगाए गए हैं। लेकिन यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले साल भी पितृ पक्ष के बाद तीन दिनों के भीतर 10,000 किलो मरी मछलियाँ निकाली गई थीं।

 

मतलब हर साल जब वही घटना सामने आ रही है, तो ऐसे में एक वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए न , जहां श्रद्धालु धार्मिक रस्में भी निभा सकें और ऐतिहासिक जल निकाय को नुकसान भी न पहुंचे। लेकिन हमारे यहां पहले से जागरूक होने के बजाय , किसी घटना होने का शायद इंतज़ार किया जाता फिर उसपर एक्शन लिया जाता है।

सवाल आस्था पर नहीं, प्रदूषण पर है

न जाने आस्था और परंपरा के नाम पर ऐसे कितने लोग पर्यावरण की हत्या कर रहे हैं । विडंबना देखिए जो लोग गंगा को माँ कहते हैं, नदियों को पवित्र मानते हैं। वही लोग तालाबों और नदियों को कचराघर बना देते हैं, उसी पानी को प्रदूषित कर देते हैं। जब कोई सवाल पूछता है तो चिल्लाते हैं- “आस्था पर सवाल मत करो। ”

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हम किसी की आस्था पर सवाल नहीं उठा रहे, आस्था के नाम पर हो रहे दिखावे पर सवाल है, उससे होने वाले प्रदूषण पर सवाल है । क्योंकि सच्ची आस्था प्रकृति की रक्षा करती है, नष्ट नहीं। आपको बता दे कि बंगंगा टैंक मुंबई का एक ऐतिहासिक तीर्थस्थल है, जिसका इतिहास 12वीं शताब्दी तक जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने यहां बाण चलाकर गंगा की धारा प्रकट की थी। अब चुनौती यही है कि आस्था और पर्यावरण, दोनों की रक्षा कैसे की जाए।

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