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लखनऊ नगर निगम ने हाईकोर्ट में जीती सहारा शहर की कानूनी लड़ाई , अब 170 एकड़ जमीन निगम के कब्जे में

सहारा शहर (Sahara City) मामले में बुधवार को नगर निगम को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से बड़ी राहत मिली है। काफी समय से चल रहे इस विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow Bench) ने सहारा कमर्शियल (Sahara Commercial) की ओर से दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

By santosh singh 
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लखनऊ। सहारा शहर (Sahara City) मामले में बुधवार को नगर निगम को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से बड़ी राहत मिली है। काफी समय से चल रहे इस विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow Bench) ने सहारा कमर्शियल (Sahara Commercial) की ओर से दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस निर्णय ने लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) की कार्रवाई को वैध माना है।

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गोमतीनगर स्थित सहारा शहर (Sahara City) की 170 एकड़ जमीन को नगर निगम ने लीज शर्तों के उल्लंघन के आरोप में अपने कब्जे में लिया था। नगर निगम का कहना था कि वर्ष 1994 में हुई लीज के तहत निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया, साथ ही कई निर्माण एवं उपयोग नियमों का उल्लंघन पाया गया। जांच के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर के छहों गेट सील कर दिए और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।

सहारा समूह (Sahara Group) ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसे मनमाना तथा प्रक्रिया के विपरीत बताया था। हालांकि, नगर निगम ने अदालत में स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई। निगम ने यह भी बताया कि वर्ष 2020 और 2025 में कई बार नोटिस जारी कर कंपनी को सुधार का अवसर दिया गया, लेकिन नियमों का पालन नहीं होने पर ही अंतिम कार्रवाई की गई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया और पाया कि नगर निगम की ओर से की गई कार्रवाई विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई है। इसी आधार पर अदालत ने सहारा की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को नगर निगम के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट हो गया है कि सार्वजनिक भूमि और संसाधनों के संरक्षण के लिए की गई कार्रवाई न्यायिक कसौटी पर खरी उतरी है। इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि संबंधित भूमि पर लीज की अवधि समाप्त होने और शर्तों के उल्लंघन के चलते नगर निगम को हस्तक्षेप करना पड़ा। तीस वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्धारित विकास कार्य नहीं किए गए थे, जिससे प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े।

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