1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. Magh Mela 2026 : आस्था के सबसे बड़े संगम में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, जानें पवित्र स्नान की सभी तारीखें

Magh Mela 2026 : आस्था के सबसे बड़े संगम में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, जानें पवित्र स्नान की सभी तारीखें

Magh Mela 2026 : नए साल 2026 को लेकर लोगों में धार्मिक और ज्योतिषीय उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार यह वर्ष सूर्य का वर्ष माना जा रहा है, इसलिए इसका असर धर्म, आस्था, तप और अच्छे कर्मों पर खास रूप से पड़ने वाला है।

By santosh singh 
Updated Date

Magh Mela 2026 : नए साल 2026 को लेकर लोगों में धार्मिक और ज्योतिषीय उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार यह वर्ष सूर्य का वर्ष माना जा रहा है, इसलिए इसका असर धर्म, आस्था, तप और अच्छे कर्मों पर खास रूप से पड़ने वाला है। इसी शुभ अवसर पर साल की शुरुआत के साथ ही सनातन परंपरा का बड़ा धार्मिक आयोजन माघ मेला (Magh Mela) आज से शुरू हो गया है।

पढ़ें :- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से फ्लाइट सेवा का हुआ शुभारंभ: CM बोले-अन्नदाता किसानों का है अमूल्य योगदान

माघ मेले (Magh Mela)  के शुरू होते ही प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालु, संत और कल्पवासी संगम में पवित्र स्नान कर रहे हैं। हर ओर भक्ति और आस्था का माहौल बना हुआ है।

जानें माघ मेला कब से कब तक चलेगा?

आज पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर पहले पवित्र स्नान का आयोजन किया गया है। इसके साथ ही संगम तट पर कल्पवास की परंपरा भी शुरू हो गई है, जिसमें श्रद्धालु पूरे माघ महीने संयम और साधना के साथ जीवन बिताएंगे। माघ मेला (Magh Mela)  करीब 40 दिनों से अधिक समय तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम पवित्र स्नान के साथ होगा। इस पूरे समय के दौरान देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु, संत और कल्पवासी प्रयागराज पहुंचकर संगम तट पर निवास करेंगे और पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे।

माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।यह समय दान, जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

पढ़ें :- चंपत राय समेत राम मंदिर घोटाले के सभी आरोपियों को तुरंत किया जाए गिरफ्तार : संजय सिंह

कल्पवास का महत्व

कल्पवास माघ मेले की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा है। कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर रहकर सादा और संयमित जीवन व्यतीत करते हैं। इस दौरान वे ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन , भूमि पर शयन, जप, तप, ध्यान और दान, क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी बनाए रखते हैं शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है। विशेष रूप से उम्रदराज और गृहस्थ इस परंपरा का पालन करते हैं।

माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां

माघ मेले (Magh Mela)  के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं

3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ)

पढ़ें :- राहुल गांधी का बीजेपी सरकार पर सीधा अटैक, बोले-आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की मिलती है सज़ा

14 जनवरी – मकर संक्रांति

21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान)

30 जनवरी – बसंत पंचमी

5 फरवरी – माघी पूर्णिमा

15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन)

आस्था और संस्कृति का महापर्व

पढ़ें :- बाबरी मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी को SIT जांच पर है भरोसा, बोले-भगवान स्वयं ढूंढ लेंगे अपने पैसे को

माघ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है.यहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...