अदाणी ग्रुप से जुड़े मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के प्रति बेहद सख्त रूख अपनाया है। नियामक ने इन विदेशी फंड्स द्वारा दायर की गई समझौता अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया है। सेबी के इस कड़े कदम से यह साफ हो गया है कि नियमों के उल्लंघन के मामले में अब इन फंड्स के खिलाफ सीधे और सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप से जुड़े मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के प्रति बेहद सख्त रूख अपनाया है। नियामक ने इन विदेशी फंड्स द्वारा दायर की गई समझौता अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया है। सेबी के इस कड़े कदम से यह साफ हो गया है कि नियमों के उल्लंघन के मामले में अब इन फंड्स के खिलाफ सीधे और सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
शर्तों पर नहीं बनी बात, जानकारियां छिपाने का आरोप
सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जांच के दायरे में आए कुल 13 FPIs में से जिन फंड्स ने मामले को सलटाने के लिए सेटलमेंट के आवेदन दिए थे, उनकी शर्तें नियामक के तय मानकों और पारदर्शिता के मानदंडों पर सही नहीं उतरीं। ये विदेशी फंड्स अपने अंतिम लाभार्थी स्वामियों से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी नियामक के साथ साझा करने से बच रहे थे। सेबी ने साफ कर दिया है कि बिना पूरी जानकारी और पारदर्शिता के कोई भी समझौता स्वीकार नहीं होगा।
अब आगे क्या?
इस मामले में सेटलमेंट की अर्जियां खारिज होने के बाद अब सेबी इन FPIs को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने की तैयारी में है। साथ ही नियमों के कथित उल्लंघन के दोषी पाए जाने पर इन फंड्स पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है या भारतीय बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध भी लग सकता है। इसके अलावा सेबी का यह फैसला संदेश देता है कि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश के वास्तविक मालिकों को छिपाने की कोशिशों को हरगिज सहन नहीं किया जाएगा।