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सुप्रीम कोर्ट ने समय और रणवीर को लगाई फटकार, 3-3 लाख रुपये का जुर्माना, बोली- “ये किस तरह के यूथ आईकॉन है”

कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों पर पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं करने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और स्पष्ट किया कि तय समय में राशि जमा नहीं करने पर आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे..

By Harsh 
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नई दिल्ली।  कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों पर पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं करने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और स्पष्ट किया कि तय समय में राशि जमा नहीं करने पर आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग खुद को युवाओं का आदर्श बताते हैं, उनसे जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है। कोर्ट ने टिप्पणी की  कि ‘ये खुद को ‘यूथ आइकॉन’ कहते हैं। मुझे नहीं पता कि वह किस तरह का यूथ आइकॉन है। यह सोचकर ही मुझे घबराहट होती है

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बेंच ने कहा कि पिछली सुनवाई में जो भरोसा दिया गया था, उसके अनुरूप बाद की कार्रवाई दिखाई नहीं दी। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर दर्ज आश्वासनों और वास्तविक व्यवहार में अंतर है। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना अपने शो लगातार कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बावजूद उन्होंने न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही उन लोगों से माफी या संवाद की पहल की, जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं।

इस पर अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान उसी व्यक्ति को मिलता है, जो दूसरों का सम्मान करना जानता हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक दोनों को कई अवसर दिए गए लेकिन उनके व्यवहार से ऐसा लगा कि लोगों का मजाक उड़ाना एक चलन बन गया है। वहीं समय रैना की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि एसएमए फाउंडेशन से संपर्क न हो पाने के पीछे किसी तरह का अहंकार नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे अपने मुवक्किल को अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन करने के लिए समझाएंगे।

गौरतलब है कि यह मामला पिछले वर्ष प्रसारित हुए शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़ा है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान विकलांगता और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि इस तरह की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय हो सकती है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।

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