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सोते समय सांसों पर नजर रखेगी Samsung की AI टेक्नोलॉजी, Galaxy Watch और Ring बताएंगे स्लीप एपनिया के संकेत

Samsung अपने Galaxy Watch और Galaxy Ring में AI आधारित स्लीप एपनिया डिटेक्शन फीचर को अपग्रेड कर रही है, जो सोते समय सांसों में होने वाली रुकावटों को तीन स्तरों में बताएगा। यह फीचर नवंबर से दक्षिण कोरिया में शुरू होगा।

By Kalpna Pandey 
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Samsung AI Feature: स्मार्टवॉच अब सिर्फ समय देखने या फिटनेस ट्रैक करने तक सीमित नहीं रह गई हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब इन्हें सेहत से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचानने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी दिशा में Samsung अपने Galaxy Watch और Galaxy Ring के स्लीप एपनिया डिटेक्शन फीचर को और एडवांस बनाने की तैयारी कर रही है।

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क्या है सैमसंग का नया AI फीचर?

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक सकती है। Samsung का नया AI आधारित फीचर रातभर सांसों से जुड़े संकेतों को ट्रैक करेगा और उनकी बारंबारता के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगा। कंपनी के मुताबिक, पहले के फीचर में मुख्य रूप से यह पता चलता था कि स्लीप एपनिया के संकेत मौजूद हैं या नहीं। लेकिन नए अपग्रेड में यूजर को इन संकेतों की फ्रीक्वेंसी के बारे में भी ज्यादा जानकारी मिलेगी।

कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी?

इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को सोते समय अपनी Galaxy Watch या संबंधित डिवाइस पहननी होगी। Samsung के अनुसार, रिजल्ट पाने के लिए कम से कम 10 दिनों के भीतर दो बार पांच-पांच घंटे की नींद के दौरान डिवाइस पहनना जरूरी होगा। इसके बाद AI एल्गोरिदम नींद के दौरान रिकॉर्ड किए गए संकेतों का विश्लेषण करेगा। सांस लेने में रुकावट से जुड़े पैटर्न और उनकी संख्या के आधार पर सिस्टम रिपोर्ट तैयार करेगा। इससे यूजर को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उसे स्लीप एपनिया के कितने संकेत दिखाई दे रहे हैं।

किन डिवाइस में मिलेगा फीचर?

कंपनी की योजना के मुताबिक, शुरुआत में इसे Galaxy Watch Ultra 2, Galaxy Watch 9 सीरीज और Galaxy Ring में रोलआउट किया जाएगा। इसके बाद Wear OS 7.0 या उससे ऊपर के वर्जन पर चलने वाली Galaxy Watch 7 और Watch 8 सीरीज में भी भविष्य के फर्मवेयर अपडेट के जरिए यह सुविधा दी जा सकती है।

हालांकि, Samsung का यह फीचर मेडिकल जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य उन लोगों में स्लीप एपनिया के संभावित संकेतों की पहचान में मदद करना है, जिन्हें पहले इस समस्या का पता नहीं है।

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फिलहाल इस फीचर की शुरुआत पहले नवंबर से दक्षिण कोरिया में होगी। भारत समेत दूसरे बाजारों में इसे कब उपलब्ध कराया जाएगा, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।

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