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Strait of Hormuz : होर्मुज खोलने के लिए यूएन में बहरीन के प्रस्ताव पर रूस ने लगाया वीटो, अब क्या करेंगे ट्रंप ?

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से ईरान के लिए राहत की खबर आई है। रूस, चीन के साथ ही फ्रांस ने भी बहरीन की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में पेश प्रस्ताव के खिलाफ वीटो लगा दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

By अनूप कुमार 
Updated Date

Strait of Hormuz :  संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से ईरान के लिए राहत की खबर आई है। रूस, चीन के साथ ही फ्रांस ने भी बहरीन की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  (United Nations Security Council) में पेश प्रस्ताव के खिलाफ वीटो लगा दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

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बहरीन ने क्यों पेश किया प्रस्ताव
होर्मुज के बंद रहने से कई देशों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। तेल और गैस का आयात-निर्यात बाधित होने पर कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। इस बीच बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत देशों को Strait of Hormuz से सुरक्षित आवागमन करने के लिए सभी जरूरी बचाव के तरीके इस्तेमाल करने का अधिकार होगा। रूस ने इस प्रस्ताव को पहले ही वीटो कर दिया है

जरूरी बचाव
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर रूस का रुख हमेशा से ही ईरान के समर्थन में रहा है। खासतौर से रूस इस मामले में अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ रहा है। होर्मुज के बंद रहने से कई देशों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत देशों को Strait of Hormuz से सुरक्षित आवागमन करने के लिए सभी जरूरी बचाव के तरीके इस्तेमाल करने का अधिकार होगा।

बहरीन के प्रस्ताव पर यूएन में रूस के वीटो के बाद अमेरिका संभवतः अपने सहयोगी देशों को Strait of Hormuz में सैनिकों की तैनाती और कार्रवाई के लिए मना सकता है। हालांकि, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों ने शुरुआत से ही होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत भेजने या किसी भी तरह से अपनी ताकत को इस संघर्ष में झोकने से इनकार कर दिया है।

फ्रांस का कहना है कि यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया है, इसलिए उसे खुद इस मामले से उलझना चाहिए। अमेरिका के लिए इस वक्त स्थिति काफी गंभीर बने हुए हैं। एक तरफ तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से यूएस पर वैश्विक दबाव बन रहा है। दूसरी तरफ ट्रंप सरकार के लिए पीछे हटना इस संघर्ष में हार मानने जैसा है।

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