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US-Iran nuclear talks : अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता ओमान में , सबकी निगाहें टिकी

अमेरिका औ र ईरान, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और व्यापक क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयास में, ओमान के मस्कट में आमने-सामने की की बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।

By अनूप कुमार 
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US-Iran nuclear talks : अमेरिका और ईरान, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और व्यापक क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयास में, ओमान के मस्कट में आमने-सामने की की बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।ये वार्ता मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य शक्ति में नए सिरे से वृद्धि और दोनों पक्षों की ओर से तीखी बयानबाजी के बीच हो रही है।

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शुक्रवार को परमाणु वार्ता के लिए यूएस और ईरान ओमान में मिलेंगे। व्हाइट हाउस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम कूटनीति पर काम कर रही है जिसका मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक लगाना है।

चर्चाओं के प्रारूप और स्थान को लेकर मतभेदों के कारण राजनयिक पहल लगभग विफल हो गई थी। हालांकि, क्षेत्रीय मध्यस्थों ने हस्तक्षेप करके संचार के रास्ते खुले रखे, जिससे दोनों प्रतिनिधिमंडलों को निर्धारित बैठक करने में सफलता मिली।

ईरानी विदेश मंत्री इस परमाणु वार्ता के लिए गुरुवार देर रात ओमान पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका की तरफ से वार्ता में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भाग लेंगे।

प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने कहा कि मुख्य दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बातचीत के लिए शुक्रवार को ओमान जाएंगे।

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सवाल बैठक की जगह बदलने को लेकर पूछा गया, तो लीविट ने इसका कोई विस्तृत कारण नहीं बताया, लेकिन इस बदलाव को प्रशासन के बड़े दृष्टिकोण का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, देखिए, राष्ट्रपति के लिए दुनिया भर के देशों से निपटने के मामले में कूटनीति हमेशा पहला विकल्प होता है, चाहे वे हमारे सहयोगी हों या हमारे दुश्मन।

यह पूछे जाने पर कि एजेंडा क्या होगा, लीविट ने ट्रंप की बताई गई मांगों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, कूटनीति आगे बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने ईरानी शासन से अपनी मांगों के बारे में काफी साफ तौर पर बताया है। जीरो परमाणु क्षमता के बारे में उन्होंने बहुत साफ कहा है, और वह देखना चाहते हैं कि क्या कोई डील हो सकती है।

लीविट ने बातचीत शुरू होने पर एक चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा, और जब ये बातचीत हो रही हैं, तो मैं ईरानी शासन को याद दिलाना चाहूंगी कि दुनिया के इतिहास की सबसे शक्तिशाली सेना के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर राष्ट्रपति के पास कूटनीति के अलावा भी कई विकल्प हैं।

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