सनातन धर्म में अक्षय तृतीया तिथि् का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) हिंदू धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक है, जिसे 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। “अक्षय” का अर्थ है – जो कभी खत्म न हो।
Akshaya Tritiya 2026 : सनातन धर्म में अक्षय तृतीया तिथि् का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) हिंदू धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक है, जिसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। “अक्षय” का अर्थ है – जो कभी खत्म न हो।
2026 में अक्षय तृतीया की तिथि और मुहूर्त
अक्षय तृतीया 2026, 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी
तृतीया तिथि प्रारंभ- 18 अप्रैल 2026 को शाम 05:31 बजे से
तृतीया तिथि समाप्त- 19 अप्रैल 2026 को दोपहर 02:12 बजे तक
अक्षय तृतीया के पौराणिक कथाओं में महाभारत की रचना प्रमुख है। इसी दिन महाभारत की रचना शुरू हुई। महाभारत की रचना को लेकर भगवान श्री गणेश और महर्षि वेद व्यास की कथा बहुत प्रचलित है।मान्यता है कि वेदव्यास ने इसी दिन भगवान गणेश को महाभारत लिखने के लिए कहा था। गणेश जी ने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे, और इस प्रकार महाभारत की रचना शुरू हुई। लेकिन इतनी विशाल कथा को लिखने के लिए उन्हें एक योग्य लेखक की आवश्यकता थी। उन्होंने भगवान ब्रह्मा की सलाह पर भगवान गणेश को लेखक बनने के लिए आमंत्रित किया।
भगवान श्री गणेश और महर्षि वेद व्यास
भगवान श्री गणेश और महर्षि वेद व्यास से लिखने के लिए एक शर्त रखी,
भगवान गणेश ने कहा, “मैं बिना रुके लिखूंगा, यदि तुम बीच में रुके तो मैं लिखना छोड़ दूंगा।”
महर्षि वेदव्यास ने भी एक शर्त रखी:
“आप हर श्लोक को समझकर ही लिखेंगे।”
परिणाम:
जब भी वेदव्यास जी को सोचने का समय चाहिए होता, वे जटिल श्लोक बोल देते।
इससे गणेश जी को समझने में समय लगता और वेदव्यास जी आगे की रचना सोच लेते।
इस प्रकार महाभारत की रचना पूरी हुई।
महाभारत की रचना से जुड़ी कई रोचक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। ये कथाएँ न केवल इसके लेखन की प्रक्रिया बताती हैं, बल्कि इसकी महानता और दिव्यता को भी दर्शाती हैं।
निष्कर्ष
महाभारत की रचना सिर्फ एक साहित्यिक कार्य नहीं, बल्कि एक दैवीय और अद्भुत प्रक्रिया मानी जाती है। इसमें ज्ञान, भक्ति, त्याग और बुद्धिमत्ता का अद्भुत संगम है।
सत्ययुग और त्रेतायुग की शुरुआत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सत्ययुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।