Women's Reservation Bill : महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन संसद में जोरदार हंगामा हुआ। इस दौरान लोकसभा में डीलिमिटेशन बिल पर बहस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। जिस पर विपक्ष का कहना है कि ये बिल 2023 में सर्वसम्मति से पास हो चुका है तो किस बात का विरोध है। अब कांग्रेस ने बिल को लेकर कहा कि वे मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण बिल को पूरी तरह से लागू करने के लिए तैयार हैं।
Women’s Reservation Bill : महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन संसद में जोरदार हंगामा हुआ। इस दौरान लोकसभा में डीलिमिटेशन बिल पर बहस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। जिस पर विपक्ष का कहना है कि ये बिल 2023 में सर्वसम्मति से पास हो चुका है तो किस बात का विरोध है। अब कांग्रेस ने बिल को लेकर कहा कि वे मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण बिल को पूरी तरह से लागू करने के लिए तैयार हैं।
दरअसल, संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर हंगामें के बीच केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार, महिला आरक्षण अधिनियम-2023, जिसके तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान गुरुवार से लागू हो गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि साल 2023 में पारित इस कानून को ऐसे समय में लागू क्यों किया गया, जब संसद में इसके क्रियान्वयन को 2029 से लागू करने के लिए संशोधन पर बहस चल रही है।
विशेष सत्र के दूसरे दिन संसद परिसर में महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा, “सबसे पहले, क्या आपने ध्यान दिया कि 2023 में उन्होंने जो कानून पास किया था, उसे कल रात ही नोटिफाई किया गया? 2023 में, पूरे सदन ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण बिल पास किया था। ये लोग हर जगह महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। कल हमने प्रधानमंत्री का ड्रामा देखा। लेकिन 2023 का कानून, जो एक संवैधानिक संशोधन है, उसे कल रात ही नोटिफाई किया गया… कल पूरे विपक्ष ने आरोप लगाया था कि आपने जानबूझकर महिला आरक्षण बिल में देरी की। यह बात उस तर्क को सही साबित करती है।”
कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने आगे कहा, “सरकार को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्हें यह बिल वापस लेना चाहिए और एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। हम मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण बिल को पूरी तरह से लागू करने के लिए तैयार हैं। कुल सीटों की संख्या 543 ही रखें और उनमें से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करें। आप इस बिल के ज़रिए महिलाओं के हितों की रक्षा नहीं कर रहे हैं। अगर आप सचमुच महिलाओं के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, तो यही सबसे अच्छा तरीका है। महिलाओं के नाम पर, आप लोकतंत्र को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी हम इजाज़त नहीं दे सकते।”