यूपी में नया सत्र शुरू होने के बाद बीते 40 दिन से बस्ते खाली हैं। शिक्षा के नाम पर भाजपा ने सिर्फ ताली बजाई। भाजपा सरकार (BJP Government) बड़े-बड़े मंचों से 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) और 'पढ़ेगा इंडिया' (Padhega India) का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के माध्यमिक स्कूलों में बच्चे किताबों के लिए तरस रहे हैं।
लखनऊ। यूपी में नया सत्र शुरू होने के बाद बीते 40 दिन से बस्ते खाली हैं। शिक्षा के नाम पर भाजपा ने सिर्फ ताली बजाई। भाजपा सरकार (BJP Government) बड़े-बड़े मंचों से ‘डिजिटल इंडिया’ (Digital India) और ‘पढ़ेगा इंडिया’ (Padhega India) का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के माध्यमिक स्कूलों में बच्चे किताबों के लिए तरस रहे हैं। सत्र शुरू हुए 40 दिन बीत जाने के बाद भी 50 हजार नौनिहालों के हाथ खाली हैं।

यूपी कांग्रेस पार्टी (UP Congress Party) ने अपने अधिकारिक एक्स पर लिखा कि क्या यही भाजपा का ‘सुशासन’ है? शिक्षा के अधिकार का गला घोंटने वाली सरकार जवाब दे कि बिना किताबों के बच्चे परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे?
बता दें कि नगर व ग्रामीण क्षेत्र में यूपी बोर्ड के संचालित अधिसंख्य माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छह से आठवीं के बच्चों को सरकारी कितायें नहीं मिली हैं। नए शैक्षिक सत्र के 40 दिन बाद भी बच्चों के बस्ते खाली हैं। प्राइमरी स्कूलों की तर्ज पर इन स्कूलों के बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग की निःशुल्क दिये जाने का नियम है। प्राइमरी स्कूलों में काफी हद तक किताबें पहुंच गई है, लेकिन शुक्रवार तक अधिकांश माध्यमिक स्कूलों के बच्चों की किताबें नहीं मिलीं। कुछ स्कूलों में आधी आधूरी किताचे ही पहुंची हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत छह से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क किताबें दिये जाने का प्रावधान है।
कक्षा एक से आठवीं के बच्चों को किताबें व कार्य पुस्तिकाएं, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निःशुल्क मुहैया करायी जाती है। लखनऊ में 101 अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूल, 50 राजकीय और 600 से अधिक निजी स्कूल में करीब 50 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। यहां कक्षा नौ से 12 वीं के चच्चों को उप्र, माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से नामित एनसीईआरटी के किताचों से पढ़ाया जाता है। ब्लॉक बार किताबों के स्टाल लगाकर किताबें मुहैया करायी जा रही हैं, लेकिन कक्षा छह से आठ के बच्चों को किताबे नाहीं मिल पा रही हैं। कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने अधिकारियों से किताबों की मांग उठायी है। वहीं गोसाईगंज के रामपाल त्रिवेदी इण्टर कॉलेज में रविवार को कक्षा नौ से 12 वीं के छात्रों के लिये एनसीईआरटी की किताबों का स्टॉल लगाया गया। बच्चों ने यहां से सस्ती किताबें खरीदी।
शिक्षकों का कहना है कि बिना किताबों के घर में अभ्यास नहीं कर पा रहे
शिक्षकों का कहना है कि बिना किताबों के बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। स्कूल में तो पढ़ा दिया जाता है, लेकिन किताबें व कार्य पुस्तिका न होने से बच्चे घर अभ्यास नहीं कर था रहे हैं। बच्चे व अभिभावक स्कूल अकर शिक्षकों पर किताबे देने का दवाव बना रहे है। शिक्षकों का कहना है कि ये सरकारी किताबे बाजार में उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते बिना किताबों के बच्चों को पढ़ाने में मुश्किलें आ रही हैं।
यहां नहीं बंटी किताबें
महिला विद्यालय इंटर कॉलेज
नारी शिक्षा निकेतन
कस्तूरबा कन्या इंटर कॉलेज
बीएन लाल इंटर कॉलेज
राजकीय उम्र सैनिक इंटर कॉलेज, सरोजनीनगर
श्री पटेल आदर्श विद्यालय ऐन
लाला रामस्वस्थ शिक्षण संस्थान
बीकेटी इंटर कॉलेज
राष्ट्रपिता स्मारक इंटर कॉलेज इटीजा
कुम्भरावा इंटर कॉलेज
एनआरएन पब्लिक कालेज समेसी
हरदोइया का पंचशील इंटर कालेज