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Ganga Dussehra 2026 Dhopap Bath : “ग्रहणे काशी, मकरे प्रयाग। चैत्र नवमी अयोध्या, दशहरा धोपाप।।”

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित धोपाप का हिन्दू धर्म में अत्यंत गहरा पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Ganga Dussehra 2026  Dhopap Bath : उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित धोपाप का हिन्दू धर्म में अत्यंत गहरा पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है। अवध क्षेत्र में एक प्रसिद्ध कहावत है –

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“ग्रहणे काशी, मकरे प्रयाग। चैत्र नवमी अयोध्या, दशहरा धोपाप।।”

अर्थात, जो महत्व ग्रहण में काशी का, मकर संक्रांति में प्रयाग का और चैत्र नवमी में अयोध्या का है, वही महत्व गंगा दशहरा के दिन धोपाप में स्नान करने का है

इस स्थान पर स्नान करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम को ब्राह्मण व ज्ञानी रावण की हत्या के कारण ‘ब्रह्महत्या’ का दोष लगा था। अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर, श्रीराम ने इसी स्थान पर आदि-गंगा गोमती नदी में स्नान किया था।

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इस पवित्र स्थान पर डुबकी लगाने से श्रीराम के सारे पाप धुल गए थे, जिसके बाद से इस पावन तीर्थ का नाम “धोपाप” (अर्थात पापों को धोने वाला) पड़ गया।

धार्मिक मान्यता है कि यहां डुबकी लगाने से मन के अपराध, कर्मों की अशुद्धियां और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती हैं, और भीतर गहरी शांति और पवित्रता का अनुभव होता है। धोपाप घाट गोमती नदी के दाहिने किनारे पर कादीपुर गांव में स्थित है।

धोपाप में भगवान राम का एक सुंदर मंदिर है, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। मंदिर परिसर में घाट पर स्नान करने के बाद भक्त दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

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