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Gig Economy :  अब लहसुन छीलने के लिए भी ऐप से आ रही है मेड, ऐप खोलिए, अपने काम के हिसाब से हेल्पर चुनिए

आज टेक्नालॉजी के जमाने में भगती दौड़ती जिंदगी को और तेज भगाने के लिए जीवनशैली में जैसे-जैसे बदलाव आ रहा है, वैसे-वैसे नए-नए बिजनेस उभर रहे हैं।

By अनूप कुमार 
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 Instant Help Apps :  आज टेक्नालॉजी के जमाने में भगती दौड़ती जिंदगी को और तेज भगाने के लिए जीवनशैली में जैसे-जैसे बदलाव आ रहा है, वैसे-वैसे नए-नए बिजनेस उभर रहे हैं। आज हर काम के लिए हेल्पर मौजूद है, बस जरूरत है तो ऐप के उक क्लिक की। सुनने में थोड़ा अटपटा जश्रर लग रहा होगा लेकिन बस अब ऐप खोलिए, अपने काम के हिसाब से हेल्पर चुनिए, कितने देर के लिए बुक करना चाहते हैं वो बताइए, फिर बुकिंग बटन टैप कर दीजिए।

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दरअसल ये गिग इकोनॉमी का दौर चल रहा है। इस दौर में मेड आपके घर आकर लहसुन छील देंगी, प्याज और सब्जियां काट देंगी।   न मोलभाव का झंझट, ना काम का किचकिच। तय कीमत और अच्छे काम की रेटिंग का हेल्पर हाजिर। गिग इकोनॉमी के दौर में हर काम आसान हो रहा है।

दिल्ली, मुंबई समेत देश के तमाम बड़े शहरों में हाउस हेल्परों के स्विगी, जमैटो, ब्लिंकिट जैसे प्लैटफॉर्म्स काम कर रहे हैं। स्नैबिट (Snabbit), बुकमाईबाई ( Bookmybai ), मिडक्लैप (Midclap), ब्रूमीज (Broomees), सुलेखा (Sulekha), हेल्पर4यू (Helper4U) जैसे अनेक प्लैटफॉर्म्स अब हाउस हेल्प से लेकर ड्राइवर तक मुहैया करवा रहे हैं। आपको घर में ही बाल कटवाने हैं, बर्तन धुलवाने, तितर-बितर हुए घर को व्यवस्थित करवाना है- जो भी जररूत है, उसे पूरा करने के लिए ऐप पर लोग मौजूद हैं। बस आपको कौन का काम करवान है या कितनी देर के लिए हेल्प चाहिए, इतना बताना है और लोग मिल जाएंगे।

ऐप बेस्ड इंस्टैंट हेल्प का बिजनेस
दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे जैसे शहरों में घरेलू कामकाज के लिए ऐप से लोगों को बुलाने का चलन तेजी से जोर पकड़ रहा है। लोग  ऐप पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। हेल्पर के खर्चे उठाने के पैसे हैं और साफ-सुथरा काम करवाने की चाहत है तो फिर ऐप बेस्ड इंस्टैंट हेल्प का बिजनेस तो बढ़ेगा ही।

ग्राहकों की संख्या बेतहाशा बढ़ी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु की कंपनी स्नैबिट के ग्राहकों की संख्या पिछले कुछ महीनों में बेतहाशा बढ़ी है। अगस्त, 2025 में स्नैबिट को महीने में करीब एक लाख जॉब ऑर्डर आए थे जो फरवरी, 2026 तक आते-आते 10 लाख प्रति माह तक पहुंच गए हैं। यानी सिर्फ छह महीने में 10 गुना बढ़ोतरी।

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वर्कर की रेटिंग
इंस्टैंट हेल्प वर्कर की कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितना काम मिलता है। सर्विस लेने वाले ऐप पर वर्कर की रेटिंग करते हैं। अच्छी रेटिंग वाले वर्करों को ज्यादा काम मिलता है और वो ज्यादा कमाई कर पाते हैं। अनुमान के अनुसार, एक अच्छी रेटिंग वाला वर्कर महीने में 25 से 30 हजार रुपये के आसपास कमा लेता है।

लिस्टेड वर्कर्स प्रफेशलनी ट्रेंड
इंस्टैंट हेल्प ऐप पर लिस्टेड वर्कर्स प्रफेशलनी ट्रेंड होते हैं और प्लैटफॉर्म्स उनका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करने के बाद ही लिस्ट करता है।

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