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शंकराचार्य आप कैसे बन गए? माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेज 24 घंटे में मांगा जवाब

मौनी अमावस्या को हुए बवाल के बाद अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने हैं। संत ने अनशन करते हुए प्रशासन से माफी मांगने की मांग की थी। लेकिन, अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके शंकराचार्य होने पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं। इसके साथ नोटिस जारी कर उनसे 24 घंटे के भीतर खुद शंकराचार्य बताने पर स्पष्टीकरण मांगा है।

By Abhimanyu 
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Swami Avimukteshwaranand News: मौनी अमावस्या को हुए बवाल के बाद अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने हैं। संत ने अनशन करते हुए प्रशासन से माफी मांगने की मांग की थी। लेकिन, अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके शंकराचार्य होने पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं। इसके साथ नोटिस जारी कर उनसे 24 घंटे के भीतर खुद शंकराचार्य बताने पर स्पष्टीकरण मांगा है।

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दरअसल, मेला प्राधिकरण ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का हवाला देते हुए सवाल पूछा है कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और अभी तक इस संदर्भ में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है, ऐसे में कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला क्षेत्र में लगे शिविर के बोर्ड पर अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ अंकित किया। जोकि न्यायालय की अवहेलना दर्शाता है।

नोटिस में कहा गया है- “उक्त अपील संख्या 3011/2020 में अद्यतन स्थिति के रूप में कोई अन्य आदेश पारित नहीं हुआ है तथा प्रकरण मा० सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जब तक मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रश्नगत अपील निस्तारित नहीं कर दी जाती, या कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के सम्बन्ध में पारित नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। अद्यतन यह स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में प‌ट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, बावजूद इसके माघमेला प्रयागराज 2025-26 में आप द्वारा अपने शिविर में लगाये गये बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित / प्रदर्शित किया गया है। आपके इस कृत्य/प्रदर्शन से मा० उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना दर्शित हो रही है। अतः एतद्वारा आपसे अपेक्षा की जाती है कि मा० सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश का परिपालन किये जाने के साथ ही इस पत्र के प्राप्ति के 24 घण्टे के अन्दर यह भी स्पष्ट करें कि आप द्वारा अपने नाम के सम्मुख शंकराचार्य शब्द का प्रयोग अथवा अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रचारित / प्रसारित कैसे किया जा रहा है?”

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