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पुरी के जगन्नाथ रथ यात्रा में होना है शामिल तो करें ये काम यात्रा रहेगी सफल और सुरक्षित

घूमना फिरना किसे नहीं अच्छा लगता। बारिश के मौसम में यात्रा करना मजेदार होता है। इस समय बरसात का महीना है और बरसात के महीनों में बहुत सारे त्यौहार पूजा पाठ होते है कोई मानसरोवर की यात्रा करता है आज हम आप को जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में बतायेंगे।

By Sudha 
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उड़ीसा  । दोस्तों घूमना फिरना किसे नहीं अच्छा लगता। बारिश के मौसम में यात्रा करना मजेदार होता है। इस समय बरसात का महीना है और बरसात के महीनों में बहुत सारे त्यौहार पूजा पाठ होते है , कोई मानसरोवर की यात्रा करता है आज हम आप को जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में बतायेंगे। हम आपको बताना चाहते है कि अगर आप भी इस बार पुरी के जगन्नाथ की रथ यात्रा करने जा रहें हैं तो हम आप को बतायेंगे की आप को क्या करना है। ताकि सुरक्षित व सफल यात्रा कर सकें। आइए बताते हैं कि जगन्नाथ रथ यात्रा कब और किस तरह करना है। इस यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लोग भारी तदाद में रथ यात्रा में शामिल होते हैं। बताया जाता है कि इस रथ यात्रा में जो शामिल होता है उसे अपने हाथों से भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खीचने का अवसर मिलता है। कहते है कि जो लोग इस यात्रा में बाबा के रथ की रस्सी अपने हाथ से खिचेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। बताते चले कि जगन्नाथ रथ यात्रा उड़ीसा के पुरी से निकाली जाती है। इसमें जगन्नाथ भगवान के रथ को खींचने की परंपरा है। यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।

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आप की यात्रा को शुभ व सुगम बनाने के लिए हम पंचांग के हिसाब से बात करें तो प्रतिवर्ष आषाढ़ के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथिे में पुरी रथ यात्रा की शुरुआत होती है। वहीं इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून को शुरू होगी। यह यात्रा देखना मन को सुकून और दिन को शुभ करने के लिए होता है भगवान जगन्नाथ की यात्रा में भगवान कृष्ण व उनकी बहन सुभद्रा को और कृष्ण के भाई बलराम को 108 कलशों से स्नान कराया जाता है। वहीं पर गुंडीचा मंदिर है जो भगवान कृष्ण की मौसी का घर है, रथ यात्रा के एक दिन पहले भगवान जगन्नाथ मौसी के घर जाते हैं। इसके बाद अगले दिन यानी 27 जून को रथ यात्रा निकाली जाएगी। बताते चले कि भगवान कृष्ण भाई बहन समेत अलग अलग रथ में सवार हो कर अपनी मौसी के घर जाते है यह रथ यात्रा पूरे 9 दिन की होती है। जाने के बाद भगवान रथ पर बैठ कर वापस भी होते हैं। उनकी वापसी 5 जुलाई को होगी।

जाने का रास्ता
उड़ीसा शहर में ये मंदिर बना है जिसे जगन्नाथ धाम कहा जाता है। आप को यात्रा करने के लिए हावई और रेल व बस मार्ग हैं। आप जिसमें जाना चाहे तो जा सकतें हैं। आप अपने बजट के हिसाब से प्लान कर के तब जयाएं और भगवान के दर्शन करें, व यात्रा का मजा लें।

 

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