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‘आमी इस्तीफा ना देबो’ ममता बनर्जी का लोकभवन जाने से इनकार, बोलीं-‘मैं हारी नहीं हूं, यह जनादेश नहीं, जबरन थोपी गई हार है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हम चुनाव हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। बीजेपी (BJP) ने चुनाव आयोग (Election Commission) का इस्तेमाल कर जीत हासिल की है।

By santosh singh 
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हम चुनाव हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। बीजेपी (BJP) ने चुनाव आयोग (Election Commission) का इस्तेमाल कर जीत हासिल की है।

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“आमी इस्तीफा ना देबो” …. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों में हार के बाद इस्तीफा देने से मना कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि वो बिल्कुल भी पद से नहीं हटेंगी? ऐसा होने पर क्या होगा? उनके खिलाफ क्या कदम उठाए जा सकते हैं? संविधान इसे लेकर क्या कहता है? क्या किसी राज्य सरकार का टर्म खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री का पद भी अपने आप खत्म हो जाता है।

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ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) या किसी भी मुख्यमंत्री के लिए चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा न देना एक गंभीर संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है। भारतीय संविधान के अनुसार ऐसी स्थिति में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Legislative Assembly) का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संविधान कहता है कि टर्म समाप्ति पर मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं होता। भारत के संविधान में मुख्यमंत्री के कार्यकाल और इस्तीफे को लेकर स्पष्ट नियम हैं।

अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। बाकी मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करते हैं। यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री राज्यपाल के चाहने तक ही अपने पद पर बने रहते हैं।

मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है। यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार जाता है या उनकी पार्टी बहुमत खो देती है, तो उनके पास सत्ता में बने रहने का नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं रह जाता।

इस्तीफा न देने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद पद छोड़ने से इनकार करता है, तो राज्यपाल के पास ये कार्रवाई कर सकता है।

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पद से बर्खास्तगी :  राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं, चूंकि मुख्यमंत्री राज्यपाल के ‘प्रसादपर्यंत’ पद पर होते हैं, इसलिए बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद इस्तीफा न देना ‘संवैधानिक मशीनरी’ की विफलता माना जाता है और राज्यपाल उन्हें पद से हटा सकते हैं।

विश्वास मत: राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं। यदि वे हार चुकी हैं, तो वे बहुमत साबित नहीं कर पाएंगी और सदन में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें हटाया जा सकेगा।

ये तो बिल्कुल साफ है कि अगर तृणमूल के पास बहुमत नहीं है, तो सरकार जारी नहीं रह सकती। ममता बस नई विधानसभा के गठन तक केयरटेकर मुख्यमंत्री के रूप में बनी रह सकती हैं,जैसे ही नतीजों की आधिकारिक अधिसूचना होती है, राज्यपाल बहुमत दल को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। उस स्थिति में उन्हें पद छोड़ना होगा।

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