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AI की ओर मार्क जकरबर्ग का रुख, मेटा में 14 हजार लोगों की नौकरियां खतरे में

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta, जो Facebook, Instagram और WhatsApp जैसी बड़ी सेवाएं संचालित करती है, एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। खास बात यह है कि कंपनी घाटे में नहीं है, फिर भी हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा अपने कुल कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 8 हजार लोगों को बाहर करने की योजना बना रही है...

By हर्ष गौतम 
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नई दिल्ली।  दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta, जो Facebook, Instagram और WhatsApp जैसी बड़ी सेवाएं संचालित करती है, एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। खास बात यह है कि कंपनी घाटे में नहीं है, फिर भी हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा अपने कुल कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 8 हजार लोगों को बाहर करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही लगभग 6 हजार नई भर्तियों पर भी रोक लगा दी गई है। यानी कुल मिलाकर 14 हजार नौकरियों पर सीधा असर पड़ने वाला है।

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इस बार छंटनी की सबसे बड़ी वजह खर्च कम करना नहीं, बल्कि कंपनी का तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ओर बढ़ना माना जा रहा है। मेटा अपने पूरे बिजनेस मॉडल को बदल रही है और अब वह ज्यादा काम मशीनों और स्मार्ट सिस्टम्स से करवाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कंपनी के अंदर ऐसे सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जो इंसानों के कई काम खुद कर सकते हैं। कोड लिखना, कंटेंट तैयार करना, डेटा का विश्लेषण करना और कई तकनीकी प्रक्रियाएं अब AI टूल्स तेजी से संभाल रहे हैं। यही वजह है कि पारंपरिक टेक जॉब्स पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

सुंदर पिचाई पहले ही कह चुके हैं कि Google में बड़ी मात्रा में कोडिंग का काम AI की मदद से हो रहा है। ऐसे में साफ है कि कोडर्स और कई अन्य टेक कर्मचारियों की भूमिकाएं तेजी से बदल रही हैं। मार्क जकरबर्ग भी पहले संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम संभाल लेगा, जिन्हें अभी इंसान करते हैं। कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है, ताकि भविष्य में ज्यादा से ज्यादा काम ऑटोमेट किए जा सकें।

यह बदलाव सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं है। Microsoft, Amazon और कई अन्य बड़ी कंपनियां भी इसी दिशा में बढ़ रही हैं। 2026 में टेक सेक्टर में हजारों नौकरियां खत्म हुई हैं और कई मामलों में AI को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। AI जहां कुछ पारंपरिक नौकरियां कम कर रहा है, वहीं नई तरह की हाई-स्किल नौकरियां भी पैदा कर रहा है। मेटा खुद AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और मशीन लर्निंग एक्सपर्ट जैसे पदों पर तेजी से भर्ती कर रही है।

असल बदलाव यह है कि अब कंपनियां ज्यादा कर्मचारियों की बजाय कम लोगों और ज्यादा AI सिस्टम्स के साथ काम करना चाहती हैं। मेटा का फोकस अब केवल सोशल मीडिया कंपनी बने रहने पर नहीं, बल्कि खुद को एक मजबूत AI-फर्स्ट कंपनी में बदलने पर है। यही वजह है कि नौकरी की दुनिया तेजी से बदलती नजर आ रही है।

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