इस दुनिया में कुछ ऐसे भी देश मौजूद हैं जहां एक भी पेड़ नहीं पाये जाते हैं या बहुत ही कम पेड़ पाए जाते हैं। इसकी कमी होने के बावजूद भी वहां लोग सामान्य रूप से सांस लेते हैं।
लखनऊ। इस दुनिया में कुछ ऐसे भी देश मौजूद हैं जहां एक भी पेड़ नहीं पाये जाते हैं या बहुत ही कम पेड़ पाए जाते हैं। इसकी कमी होने के बावजूद भी वहां लोग सामान्य रूप से सांस लेते हैं।
आइए जानते हैं इसके पीछे की हक़ीकत
जब कभी भी हम कुदरत की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में पेड़-पौधों का ही ख्याल आता है। पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन देने के साथ-साथ गर्मी से भी बचाते हैं। ये वातावरण को शुद्ध रखते हुए धरती को भी जीवंत बनाते में मदद करते हैं। इसी वजह से पेड़-पौधों को “पृथ्वी का ऑक्सीजन बैंक” कहा जाता है।
हम में से अधिकतर लोग हरे-भरे जगहों पर सैर करना पसंद करते हैं क्योंकि लगभग हर व्यक्ति को हरियाली पसंद होती हैं और बिना पेड़-पौधों के जीवन की कल्पना भी असंभव लगती है। लेकिन जरा गौर कीजिए, अगर किसी एक देश में पेड़ ही न हों तो क्या होगा? यह बात सुनने में बहुत ही अजीब लगती है, लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां पेड़ लगभग हैं ही नहीं या नहीं के बराबर हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि वहां के लोग सामान्य रूप से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। तो, आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ अद्भुत देशों के बारे में:
ग्रीनलैंड- इस देश का नाम सुनते ही हम सबके दिमाग में हरियाली, जंगल और पेड़-पौधों की तस्वीरें सामने आने लगती है। लेकिन यहां की सच्चाई इससे बिल्कुल ही अलग है। ग्रीनलैंड का ज्यादातर भाग सालों भर बर्फ से ढका रहता है यहां दूर-दूर तक सिर्फ बर्फ ही बर्फ नजर आती है। इस इलाके में इतनी ठंड है कि पेड़ों का उगना लगभग असंभव है हालांकि कुछ जगहों पर छोटे-छोटे पौधे या झाड़ियां जरूर मिल जाती हैं। लेकिन अगर बड़े पेड़ों की बात करें तो लगभग नहीं के बराबर हैं। इतिहासकारों के अनुसार, इस जगह का नाम “ग्रीनलैंड” लोगों को आकर्षित करने के लिए रखा गया था ताकि लोग यहां बसने के लिए आयें। लेकिन असलियत में इस जगह का हरियाली से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं हैें।
कतर- कतर(Qatar) एक बहुत ही अमीर और आधुनिक देश जो अपनी शानदार इमारतों और रॉयल तथा लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है। यहां की एयरलाइंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पुरी दुनिया में मशहूर हैं। यहां जाने और घुमने के लिए लोग बहुत पैसा खर्च करते हैं, लेकिन अगर बात करें प्रकृति की, तो कतर में हरियाली बहुत ही कम दिखाई देती हैं। इस देश का ज्यादातर इलाका रेगिस्तान हैं तथा बारिश भी बहुत कम होती है। इस वजह से यहां पेड़ों का उगना काफी मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अब कतर सरकार पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रही है। यहां एक बड़े “मैन-मेड फॉरेस्ट” यानी आर्टिफिशियल जंगल (Artificial Forest) बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जिसमें हजारों पेड़ लगाए जाएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मानव-निर्मित जंगलों (Man-made forests) में से एक हो सकता है।
ओमान: उपर्युक्त देशों के अलावा ओमान में भी पेड़-पौधों की संख्या बहुत कम है और यहां भी कुदरती हरियाली लगभग ना के बराबर ही देखने को मिलती है। यहां पर साल 1990 तक स्थिति इतनी खराब थी कि यहां का वन क्षेत्र लगभग शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया था, यानी देश में जंगलों का नामोनिशान तक नहीं था। हालांकि समय के साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए कुछ संस्थाओं और संगठनों ने पहल शुरू की हैं। वे कृत्रिम तरीके से पेड़ लगाने यानी मानव निर्मित वन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यहां हरियाली बढ़ाई जा सके। फिर भी, इन प्रयासों के बावजूद ओमान में हरियाली बहुत कम है और ज्यादातर वहां सूखे और रेगिस्तानी क्षेत्र मौजूद हैं।
पेड़ों के बिना कैसे चल रही है जिंदगी?
यहां के लोग आधुनिक तकनीक(Modern Technology) और प्राकृतिक संतुलन के दूसरे साधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन जगहों पर ऑक्सीजन का संतुलन समुद्री हवाओं, छोटे पौधों और वैश्विक वातावरण के जरिए बना रहता है और साथ ही, वर्तमान में एयर प्यूरीफिकेशन और ग्रीन टेक्नोलॉजी भी ऑक्सीजन बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।
रिपोर्ट : सुशील कुमार साह