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ईरान युद्ध तो रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की दिमाग की उपज थी, डोनाल्ड ट्रम्प बोले- मैंने इस जंग का नहीं था पक्षधर, खुद का किया बचाव

ईरान युद्ध (Iran War) के चौथे हफ्ते में पहुंचने और इस बारे में लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके बीच अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई क्यों और कैसे शुरू की? अब इस पर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के पास इस संघर्ष की शुरुआत के बारे में बताने के लिए एक नई कहानी गढ़ी है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली: ईरान युद्ध (Iran War) के चौथे हफ्ते में पहुंचने और इस बारे में लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसके बीच अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई क्यों और कैसे शुरू की? अब इस पर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के पास इस संघर्ष की शुरुआत के बारे में बताने के लिए एक नई कहानी गढ़ी है।

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अमेरिका के टेनेसी राज्य में हुई एक बैठक में सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने संकेत दिया कि उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सैन्य कार्रवाई के लिए जोर दिया था। ट्रंप ने अपने बगल में बैठे हेगसेथ से कहा, कि पीट, मुझे लगता है कि आप ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस बारे में बात की थी, और आपने कहा था कि ‘चलो ऐसा करते हैं, क्योंकि आप उन्हें परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने दे सकते।

हम इसे ट्रंप की नई कहानी इसलिए भी कह रहे हैं, क्योंकि वे पहले ऐसे कई कारण बता चुके हैं कि क्यों और किस लिए यह जंग उन्होंने शुरू की? अब जहां से इससे खुद को अलग करते और अपने रक्षा सचिव को धकेलते नजर आ रहे हैं ।

टेनेसी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने के फैसले की जिम्मेदारी अपने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Defense Secretary Pete Hegseth) पर डालते हुए दिखाई दिए। मेम्फिस सेफ टास्क फोर्स की एक बैठक के दौरान ट्रंप ने जंग शुरू करने की इस एक जानकारी को साझा किया। इस टिप्पणी ने वॉशिंगटन में सबका ध्यान खींचा है, जहां अधिकारी और विश्लेषक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि प्रशासन के भीतर किसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए जोर दिया था।

युद्ध में जाने के फैसले पर विरोधाभासी बयान

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ईरान पर हमला करने का फैसला कैसे लिया गया, इस बारे में ट्रंप की टिप्पणियों से उनके प्रशासन के भीतर से आ रही बदलती हुई सफाइयों की कड़ी में एक और बात जुड़ गई है। जिस पल यह फैसला लिया गया था, उसका जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन को मंजूरी देने से पहले उन्होंने कई सीनियर अधिकारियों को फोन किया था।

उन्होंने कहा, कि मैंने पीट को फोन किया। मैंने जनरल केन को फोन किया। मैंने अपने कई बेहतरीन लोगों को फोन किया।’ वे इस बात पर हुई चर्चा के बारे में बता रहे थे कि ईरान से बढ़ते हुए खतरे का मुकाबला किया जाए या नहीं। यह युद्ध, जो फरवरी के आखिर में अमेरिका के हमलों से शुरू हुआ था, अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल गया है। ईरान पर हुए हमले ने अब अमेरिका के सहयोगियों को भी इसकी चपेट में ले लिया है और जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, ईरान ने भी लगातार दूसरे पक्ष को नुकसान पहुंचाया है और पहुंचा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस अभियान को ईरान के मिसाइल प्रोग्राम, ड्रोन बनाने की क्षमताओं और नौसेना की ताकत को खत्म करने की कोशिश के तौर पर पेश किया था।

हेगसेथ ने क्या कहा?

हेगसेथ ने युद्ध के प्रयासों का बचाव करने में एक अहम भूमिका निभाई है> वे नियमित रूप से पेंटागन में पत्रकारों को जानकारी देते हैं और अमेरिकी सेना के लक्ष्यों के बारे में बताते हैं। उन्होंने इस अभियान की आलोचना का भी जवाब दिया है और मीडिया के कुछ हिस्सों पर इस संघर्ष को नकारात्मक रूप से दिखाने का आरोप लगाया है। हाल ही में जब उनसे पूछा गया कि यह सैन्य अभियान कब तक चल सकता है, तो हेगसेथ ने कोई समय-सीमा बताने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि हम कोई पक्की समय-सीमा तय नहीं करना चाहते। साथ ही यह भी जोड़ा कि यह मिशन पूरी तरह से सही दिशा में चल रहा है । अंततः ट्रंप ही यह तय करेंगे कि इसका अंत कैसे होगा?

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डेडलाइन आगे बढ़ी, सवाल बने हुए

ट्रंप ने ईरान के लिए सोमवार तक की डेडलाइन तय की थी कि वह मांगें पूरी करे या फिर आगे और हमले झेले। अब उस डेडलाइन को पांच दिन और बढ़ा दिया गया है। बदलते जवाब, बातचीत से इनकार और अब जिम्मेदारी तय करने की नई कोशिश के बीच, युद्ध के बारे में कहानी उतनी ही तेजी से बदल रही है जितनी तेजी से यह लड़ाई खुद है। जो नहीं बदला है, वह है यह पक्का न होना कि युद्ध कैसे शुरू हुआ? यह कहां जा रहा है, और आखिरकार इसे शुरू करने का फैसला किसका है?

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