1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. पीएम मोदी की अपील पर अखिलेश ने कसा तंज, बोले- चुनाव खत्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया

पीएम मोदी की अपील पर अखिलेश ने कसा तंज, बोले- चुनाव खत्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया

Akhilesh Attacks PM Modi's Appeal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। उन्होंने देश की जनता से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल को कम करने को कहा। जिस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया। 

By Abhimanyu 
Updated Date

Akhilesh Attacks PM Modi’s Appeal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। उन्होंने देश की जनता से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल को कम करने को कहा। जिस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया।

पढ़ें :- 'मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे... ये उपदेश नहीं नाकामी के सबूत हैं...' राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर साधा निशाना

सपा सांसद अखिलेश यादव ने सोमवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’… इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है। सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।”

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश ने आगे कहा, “वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।”

उन्होंने कहा, “अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।”

अखिलेश ने कहा, “भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी। देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!”

पढ़ें :- मंत्रिमंडल विस्तार के बाद BJP विधायक का छलका दर्द, कहा-एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते कहीं न कहीं मन में थोड़ी पीड़ा अवश्य हुई

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...