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मनरेगा बचाने के लिए मजदूर बन राहुल गांधी-मल्लिकार्जुन खरगे मैदान में कूदे, माथे पर गमछा और कंधे पर फावड़ा…

देश की सियासत  से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरे अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए। सूट-बूट और सफेद कुर्ते की जगह उनके माथे पर देसी गमछा बंधा था और हाथों में फावड़ा था। यह महज कोई फोटो खिंचवाने का मौका नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार के उस नए फैसले के खिलाफ एक खुला विद्रोह था।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। देश की सियासत  से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश में सनसनी मचा दी है। देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरे अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए। सूट-बूट और सफेद कुर्ते की जगह उनके माथे पर देसी गमछा बंधा था और हाथों में फावड़ा था। यह महज कोई फोटो खिंचवाने का मौका नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार के उस नए फैसले के खिलाफ एक खुला विद्रोह था। जिसे कांग्रेस गरीबों को गुलाम बनाने की साजिश करार दे रही है। विवाद की जड़ में मोदी सरकार का नया ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’, जिसने मनरेगा के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MNREGA) का नाम बदलकर और इसके स्वरूप को बदलकर खत्म करने की राह पर है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बहुत ही तीखे शब्दों में कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत की ‘ऑक्सीजन’ है।

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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जीवन रेखा को काटा गया, तो गांव का गरीब पूरी तरह टूट जाएगा। कांग्रेस के मुताबिक यह सिर्फ एक नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की जन-स्मृति से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम मिटाने और ग्राम स्वराज की बुनियादी सोच को कुचलने की कोशिश है, जिसे दशकों की मेहनत से खड़ा किया गया था।

मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) का हमला राहुल से भी ज्यादा तीखा रहा। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को निशाना बनाया जा रहा है ताकि देश के दबे-कुचले लोगों को फिर से ‘बंधुआ मजदूर’ बनाया जा पाएं। खरगे का तर्क है कि जब गरीब के पास 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी नहीं होगी, तो वह मजबूर होकर चंद रुपयों के लिए अमीरों के इशारों पर नाचने को मजबूर हो जाएगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कहा कि सरकार लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है, कांग्रेस ‘हिमाकत’ को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। यह लड़ाई सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम को लेकर सरकार की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने घोषणा की है कि पार्टी मनरेगा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखना होगा कि बजट सत्र के दौरान सरकार क्या सफाई देती है।

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