सनातन धर्म वैशाख माह को बहुत पुनीत माना जाता है। इस की अमावस्या को स्नान, दान और पितरों का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
Vaishakh Amavasya 2026 : सनातन धर्म वैशाख माह को बहुत पुनीत माना जाता है। इस माह की अमावस्या को स्नान, दान और पितरों का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी, क्योंकि उदयातिथि उसी दिन पड़ रही है।
अमावस्या की रात को चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है, इसलिए इसे ऊर्जा के स्तर पर संवेदनशील समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नकारात्मक प्रभाव थोड़ा बढ़ सकता है। यही कारण है कि इस रात कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है, ताकि घर और मन दोनों में संतुलन बना रहे।
पितरों का तर्पण
धर्म ग्रंथों के अनुसार, यदि इस दिन तर्पण नहीं किया जाता, तो पितरों की तृप्ति अधूरी रह सकती है। गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि जिन पितरों को समय पर जल, तिल और श्रद्धा से तर्पण नहीं मिलता, वे असंतुष्ट रह जाते हैं। यह असंतोष सीधे किसी दंड के रूप में नहीं आता, बल्कि जीवन में अकारण बाधाएं, मानसिक अशांति और कार्यों में रुकावट के रूप में महसूस हो सकता है।
मन को शांत रखें
क्रोध, विवाद या नकारात्मक सोच इस दिन से दूर रखें। शांत और सकारात्मक मन ही इस दिन का असली लाभ दिला सकता है।
तामसिक भोजन से बचें
मांस और मदिरा का सेवन इस दिन शुभ नहीं माना जाता। हल्का और सात्विक भोजन शरीर और मन दोनों के लिए बेहतर रहता है।