1. हिन्दी समाचार
  2. क्रिकेट
  3. पहली बार एक ओवर में छह छक्कों का करिश्मा दिखाने वाले दिग्गज का निधन, क्रिकेट ने खोया अपना सबसे महान ऑलराउंडर

पहली बार एक ओवर में छह छक्कों का करिश्मा दिखाने वाले दिग्गज का निधन, क्रिकेट ने खोया अपना सबसे महान ऑलराउंडर

क्रिकेट जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद भावुक रहा। वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने की है। हालांकि बोर्ड की ओर से उनकी मौत का कारण नहीं बताया गया...

By Harsh 
Updated Date

Cricket Updates: क्रिकेट जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद भावुक रहा। वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने की है। हालांकि बोर्ड की ओर से उनकी मौत का कारण नहीं बताया गया। सोबर्स के जाने से क्रिकेट ने ऐसा खिलाड़ी खो दिया, जिसे खेल के इतिहास के सबसे संपूर्ण ऑलराउंडरों में गिना जाता है।

पढ़ें :- 'लोग मुझ पर विश्वास नहीं करते', ईशान किशन के इस बयान ने मचाई खलबली; टेस्ट क्रिकेट पर कही बड़ी बात

जब पहली बार एक ओवर में लगे छह छक्के

सर गैरी सोबर्स ने 1968 में क्रिकेट इतिहास का ऐसा कारनामा किया, जिसकी दुनिया भर में चर्चा हुई। इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने ग्लैमरगन के गेंदबाज मैल्कम नैश के एक ही ओवर की छहों गेंदों पर लगातार छह छक्के जड़ दिए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। बाद में रवि शास्त्री, हर्शल गिब्स और युवराज सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भी यह उपलब्धि हासिल की।

बल्ला, गेंद और फील्डिंग… हर विभाग में थे बेमिसाल

सोबर्स सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज ही नहीं थे बल्कि तेज और स्पिन—दोनों तरह की गेंदबाजी करने में माहिर थे। मैदान पर उनकी फुर्ती और शानदार फील्डिंग उन्हें अपने दौर का सबसे संपूर्ण क्रिकेटर बनाती थी। यही वजह रही कि क्रिकेट की प्रतिष्ठित पत्रिका विजडन ने उन्हें 20वीं सदी के पांच महानतम क्रिकेटरों में शामिल किया जबकि सर डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें अपने समय का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बताया था।

पढ़ें :- IND vs SL Colombo Test : श्रीलंकाई टीम पहली पारी में 290 रनों पर ढेर, भारत ने मेजबान टीम को दिया फॉलोऑन

21 साल की उम्र में बनाया था विश्व रिकॉर्ड

बारबाडोस में 28 जुलाई 1936 को जन्मे गैरी सोबर्स ने महज 16 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। 1954 में उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। इसके तीन साल बाद पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर उन्होंने उस समय टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया। आज भी वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम उम्र में तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं।

संघर्षों से भरा रहा बचपन

सोबर्स का बचपन आसान नहीं था। जब वह केवल पांच साल के थे तब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके पिता की मौत हो गई थी। उनकी मां ने अकेले छह बच्चों की परवरिश की। बेहद साधारण परिस्थितियों में पले-बढ़े सोबर्स ने सड़क और समुद्र किनारे क्रिकेट खेलते हुए अपने सपनों को आकार दिया। दिलचस्प बात यह भी है कि उनका जन्म दोनों हाथों में एक-एक अतिरिक्त उंगली के साथ हुआ था जिन्हें बाद में हटा दिया गया।

क्रिकेट में योगदान के लिए मिला था ‘सर’ का सम्मान

पढ़ें :- टीम इंडिया ने कोलंबो टेस्ट में बनाई मजबूत पकड़! पंत-जुरेल की फिफ्टी पूरी, दूसरे दिन लंच तक स्कोर- 419/6

क्रिकेट में असाधारण योगदान के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने वर्ष 1975 में उन्हें ‘नाइटहुड’ से सम्मानित किया था। 1998 में उन्हें बारबाडोस के राष्ट्रीय नायकों में शामिल किया गया। उनके सम्मान में वहां सर गारफील्ड सोबर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निर्माण कराया गया। सर गैरी सोबर्स का नाम सिर्फ रिकॉर्ड्स में नहीं बल्कि क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। उनके निधन से विश्व क्रिकेट ने एक ऐसे महान खिलाड़ी को खो दिया है जिसकी बराबरी करना किसी भी ऑलराउंडर के लिए आसान नहीं होगा।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...