देश की राजधानी दिल्ली के महरौली से 10 साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या का मामला इतनी जल्दी नहीं सुलझ पाता यदि बच्ची के पिता ने पुलिस को इसकी महत्वपुर्ण सूचना न दी होती। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बच्ची का अपहरण उस वक्त हुआ जब वो और उसके माता-पिता फुटपाथ पर सो रहे थे। बच्ची के अपहरण के समय सभी नींद की अवस्था में थे।
Delhi Minor Rape-Murder: देश की राजधानी दिल्ली के महरौली से 10 साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या का मामला इतनी जल्दी नहीं सुलझ पाता यदि बच्ची के पिता ने पुलिस को इसकी महत्वपुर्ण सूचना न दी होती। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बच्ची का अपहरण उस वक्त हुआ जब वो और उसके माता-पिता फुटपाथ पर सो रहे थे। बच्ची के अपहरण के समय सभी नींद की अवस्था में थे। ऐसे में पिता उस हाल में जो भी याद रख सके उन्होंने पुलिस को बताया। लड़की के पिता ने जो भी बात बताई वही बात पुलिस के लिए अहम सुराग बनी और फिर डिजिटल फुटप्रिंट आदि की मदद से सिर्फ सात घंटे में ही पुलिस की 9 टीम्स ने आरोपी को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
पिता ने पुलिस को क्या बताया?
पुलिस को दिए अपने तहरीर में पिता ने बताया कि बच्ची का अपहरण एक पीली नंबर प्लेट वाली सफेद वैगनआर कार चालक ने किया था। इस बात ने पुलिस को जांच शुरू करने के लिए बड़ा सुबूत दे दिया।
कैसे कैब ड्राइवर बबलू ने प्लान की पूरी साजिश?
पुलिस ने बताया है कि बासु सिंह ऊर्फ बबलू ने अपने छिपने की पूरी योजना बना ली थी। जिस दिन ये वारदात हुई बबलू रूटीन पिकअप के लिए महरौली में आया था। जब उसने बच्ची को देखा तो अपनी योजना बदल लिया। साथ ही उसने बच्ची पर करीब 45 मिनट तक नजर बनाए रखी। उसके बाद काफी सोच समझकर उसने बच्ची का अपहरण किया और फिर रेप करने के बाद उस मासूम की हत्या कर दी। इसके बाद बबलू ने अपना फोन बंद कर दिया। क्योंकि उसे लगा था कि फोन स्विच ऑफ करने से वह पुलिस से बच जाएगा लेकिन उसके कैब के डिजिटल फुटप्रिंट की वजह से वह पकड़ा गया।
ज्वाइंट सीपी ने बनाई 9 टीम्स
जैसे ही पुलिस को बच्ची के अपहरण की शिकायत मिली, उसके बाद पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। आरोपी को पकड़ने के लिए ज्वाइंट सीपी विजय कुमार ने 9 टीम बनाई। इन टीम्स को डीसीपी अनंत मित्तल सुपरवाइज कर रहे थे। सबसे पहले टीम्स ने घटना के आसपास के इलाके की डिजिटल मैपिंग की और वहां कैब ड्राइवर्स के सभी एक्टिव फोन का पता लगाया। फिर जहां से अपहरण हुआ वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे में सफेद कार अंधेरे में जाती दिखी तो उसकी जांच की गई। इस क्लू के बाद कैब एग्रीगेटर्स के लोकेशन देखे गए और 70 अन्य सीसीटीवी कैमरों की फुटेज छानबीन कर संदिग्ध कैब ड्राइवर का इलेक्ट्रॉनिक रूट को ट्रेस की गई। जब सारे डेटा को खंगाला गया तो पुलिस ने जीपीएस रिफरेंस की मदद से सफेद कैब पर फोकस शुरू कर दिया। इसके बाद महरौली एसएचओ रितेश शर्मा की अध्यक्षता में बनी 15 पुलिसवालों की टीम ने आरोपी कैब ड्राइवर के फोन की आखिरी लोकेशन का पता लगाया।
एक गलती से हुआ गिरफ्तार
जैसे—जैसे समय बीत रहा था पुलिस टीम को बच्ची की जान की चिंता सता रही थी। इसी छानबीन के बीच पुलिस को आरोपी के गुरुग्राम में रहने वाले भाई का पता चला जिससे पूछताछ की। दोपहर तक पुलिस की तत्परता और टेक्नोलॉजी मदद से पुलिस ने आरोपी की लोकेशन पता कर लिया। इसके बाद पश्चिम दिल्ली के विकासपुरी से उसे मात्र 7 घंटों की जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जब वह पकड़ा गया उस वक्त वह कैब बुकिंग उठाने के लिए फोन ऑन किया था, जिसकी वजह से पकड़ा गया। हांलाकि शुरुआत में आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा और बचने की कोशिश करता रहा लेकिन बाद में उसने अपना जुर्म इकरार कर लिया। साथ ही उसने अपने बयान में बताया कि उसने बच्ची के अपहरण के बाद उसका रेप किया और फिर हत्या कर शव को फेंक दिया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी के बताए पते से बच्ची के शव की तलाश शुरू की और मंगलवार शाम 4.30 बजे तक शव बरामद कर लिया। इसके बाद क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए आरोपी को घटनास्थल ले जाया गया। हांलाकि आरोपी ने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन मौजूदा पुलिस की फायरिंग में उसके पैर में गोली लग गई। इस तरह से वह गिरफ्तार हो गया।