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Ram Mandir Donation Theft Case : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार व ट्रस्ट से जवाब मांगा, SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद (Ram Mandir Donation Theft Case) अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पहुंच गया है। कोर्ट ने मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश एसआईटी (UP SIT) से स्टेटस रिपोर्ट और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) से भी जवाब मांगा है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद (Ram Mandir Donation Theft Case) अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पहुंच गया है। कोर्ट ने मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश एसआईटी (UP SIT) से स्टेटस रिपोर्ट और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) से भी जवाब मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने मामले की आगे की सुनवाई 20 जुलाई को तय की है। बेंच ने मंदिर का प्रबंधन कर रहे ट्रस्ट के साथ-साथ राज्य सरकार और केंद्र से भी जवाब मांगा है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, जो अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी, हेराफेरी और गड़बड़ी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से पैरवी की। मेहता ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में दाखिल की जाएगी। उन्होंने राज्य और केंद्र के लिए नोटिस स्वीकार कर लिया है। एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि, सीसीटीवी फुटेज और दूसरे रिकॉर्ड को संभालकर रखने की जरूरत है। दूसरे वकील ने आग्रह किया कि राज्य की तरफ से दाखिल की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट की एक कॉपी उन्हें भी दी जाए। हालांकि, बेंच ने इस चरण पर आग्रह मानने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि हम बाद में देखेंगे। यह एक चल रही जांच है।

दो पिटीशन, वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए फाइल की है। इसमें सीबीआई जांच (CBI Investigation) की मांग की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि योगी सरकार, उत्तर प्रदेश पुलिस और राज्य एसआईटी पर निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना भेदभाव के जांच के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है।

आरजेडी सांसद की दाखिल की गई याचिका में अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। याचिका में मंदिर ट्रस्ट को यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह 5 फरवरी, 2020 को बनने के बाद से मिले सभी दान, जैसे पैसे और कीमती सामान का पूरा ब्योरा कोर्ट के सामने रखे।

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याचिका में कहा गया है कि यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या यूपी के प्रशासन, लाखों भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा और देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक में लोगों के भरोसे को बनाए रखने से जुड़े बहुत जरूरी सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाती है।

याचिका में भक्तों के चढ़ावे से निपटने से जुड़े आरोपों की चल रही जांच को निष्पक्ष, स्वतंत्र और देश का भरोसा जगाने वाला बनाने के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया गया है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश देने की अपील की गई है कि वह अपने बनने के बाद से मिले सभी दान, चढ़ावे और योगदान का पूरा ब्यौरा दे। इस ब्यौरे में कैश दान, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल पेमेंट, विदेशी योगदान, तरह-तरह के दान, सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजें, साथ ही उनके लेखांकन, अभिरक्षा और इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए।

वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की तरफ से दायर दूसरी याचिका में कहा गया है कि एक संस्था जो भरोसेमंद हैसियत से काम कर रही है, उसके फंड को जिस तरह से संभाला जा रहा है, उससे उन अनगिनत भक्तों और आम लोगों की आस्था, भावनाओं और भरोसे को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है, जिन्होंने जन्मभूमि पर भगवान श्री राम मंदिर बनाने के लिए अपनी मर्जी से योगदान दिया है।

याचिका में कहा गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गायब हुए फंड, अकाउंटिंग में गड़बड़ी और दूसरी वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े आरोप कितने सच हैं या नहीं, इसका पता सिर्फ एक ऐसी एजेंसी से पूरी, स्वतंत्र और पेशेवर जांच के जरिए ही लगाया जा सकता है, जिसके पास खास जानकारी, जरूरी स्रोत , तकनीकी क्षमताएं और मुश्किल वित्तीय और आर्थिक अपराधों की जांच के लिए एक बना-बनाया संस्थागत ढांचा हो।

एक वकील, नरेंद्र कुमार गोस्वामी की तरफ से दायर तीसरी याचिका में यह ऐलान करने की मांग की गई कि अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम लला विराजमान को भक्तों द्वारा दिया गया चढ़ावा, जिसमें कैश, सोना, चांदी, गहने, कीमती सामान और डिजिटल दान शामिल हैं, ट्रस्ट की पवित्र संपत्ति है, जिसे पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद तरीके से संभालने की जरूरत है।

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