भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के मुद्दे के बीच विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) का बयान देशवासियों का ध्यान खींच रही है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने अपने बयान में कहा कि पासपोर्ट आपकी नागरिकता का सबूत नहीं है, जो एक बड़े तबके को परेशान कर रहा है। लोगों की मुद्दे पर अलग-अलग राय है।
नई दिल्ली: भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के मुद्दे के बीच विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) का बयान देशवासियों का ध्यान खींच रही है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने अपने बयान में कहा कि पासपोर्ट आपकी नागरिकता का सबूत नहीं है, जो एक बड़े तबके को परेशान कर रहा है। लोगों की मुद्दे पर अलग-अलग राय है। इस बीच, मशहूर गीतकार जावेद अख्तर (Renowned lyricist Javed Akhtar) ने मंत्रालय की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बयान को बेतुका बताया और तीखा सवाल उठाया कि अधिकारी असली नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बीच कैसे फर्क करता है?
विवाद की शुरुआत 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस (14th Passport Seva Divas) के मौके पर तब हुई, जब विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा कि पासपोर्ट का मकसद अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है। सिर्फ पासपोर्ट होने से किसी की नागरिकता साबित नहीं होती। सोशल मीडिया पर इस बयान पर तीखी बहस छिड़ गई है, क्योंकि भारत में पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही जारी किए जाते हैं। 81 साल के जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने एक्स पर मंत्रालय के रुख पर सवाल उठाते हुए तीखा रिएक्शन दिया। उन्होंने लिखा कि ‘विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा के लिए एक दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं। अगर वाकई में ऐसा है, तो क्या वे कुछ लोगों को यह दस्तावेज बिना पूरी तरह आश्वस्त हुए दे रहे हैं कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है? यह बेतुकी बात है।
अवैध प्रवासियों के जरिये उठाए सवाल
जावेद अख्तर (Javed Akhtar) के बयान पर जब एक यूजर ने कमेंट किया कि आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों को भी नागरिकता का सबूत नहीं माना जाता है, तो गीतकार ने अपनी बात पर जोर दिया। उन्होंने जवाब दिया, ‘सिस्टम में कौन इन अवैध प्रवासियों को बिना शर्त मदद पहुंचा रहा है? वे ऐसे बुरे हालात में नकली और असली नागरिकों के बीच कैसे फर्क करते हैं?’
पासपोर्ट पर बहस ने फिर से सवाल पर ध्यान खींचा है कि असल में भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) का पक्का सबूत क्या है? साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (Special Intensive Revision) पर सुनवाई के दौरान साफ किया था कि आधार नागरिकता (Aadhaar Citizenship) का पक्का सबूत नहीं है और यह सिर्फ पहचान का दस्तावेज है। इसी तरह, वोटर आईडी कार्ड को नागरिकता के दस्तावेज के बजाय पहचान और पते के सबूत के तौर पर देखा जाता है। ईटाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) कानूनों के तहत 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद, मगर 1 जुलाई 1987 से पहले देश में पैदा हुआ व्यक्ति जन्म से नागरिक माना जाता है। जुलाई 1987 के बाद पैदा हुए लोगों के लिए जन्म से नागरिकता का नियम तब लागू होता है, जब माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो। 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद पैदा हुए लोगों के लिए जरूरी है कि उनके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों या फिर उनमें से कोई एक नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध प्रवासी न हो।