सियासत का मिजाज विचित्र है। अच्छे को बुरा, मानना। बुरे को अच्छा, कहना। शायद चंद्रशेखर के साथ भी यही हुआ। चंद्रशेखर ने सत्ता से पहले मानवीय संबंधों को तरजीह दी। सियासत के कठोर मैदान में भी अपनी संवेदनशीलता, करुणा और मानवीयता जिंदा रखा। इस अर्थ में चंद्रशेखर दुर्लभ लोगों में
